अमेरिका-ईरान तनाव का असर, महंगी होगी बनारसी साड़ी; 10 सितंबर से 15% बढ़ेंगे दाम
वाराणसी की पहचान मानी जाने वाली बनारसी साड़ी अब महंगी होने जा रही है। अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर बनारसी साड़ियों के कारोबार पर पड़ा है। इसके चलते बुनकरों और कारोबारियों ने एकमत होकर 10 सितंबर से साड़ियों के दाम में करीब 15 प्रतिशत वृद्धि करने का फैसला लिया है।
कच्चे माल की बढ़ती कीमतों से बढ़ी लागत
बनारसी साड़ी बनाने में इस्तेमाल होने वाले रेशम, जरी और अन्य सामग्री की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। बुनकरों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण आयातित कच्चे माल की लागत बढ़ गई है, जिससे उत्पादन खर्च भी बढ़ गया है।बढ़ती लागत के कारण लंबे समय से बुनकर और व्यापारी साड़ी के दाम बढ़ाने पर विचार कर रहे थे। अब सभी की सहमति के बाद कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला लिया गया है।
बुनकरों ने लिया सामूहिक फैसला
बनारसी साड़ी उद्योग से जुड़े बुनकरों और कारोबारियों ने बैठक कर इस मुद्दे पर चर्चा की। बैठक में तय किया गया कि लागत के हिसाब से कीमतों में संशोधन जरूरी है।बुनकरों का कहना है कि मौजूदा कीमतों पर साड़ी तैयार करने में मेहनत और खर्च के अनुसार उचित लाभ नहीं मिल पा रहा था। इसलिए 10 सितंबर से नई दरें लागू की जाएंगी।
ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा असर
दाम बढ़ने का सीधा असर ग्राहकों पर पड़ेगा। खासकर शादी-ब्याह और त्योहारों के सीजन में बनारसी साड़ी खरीदने वालों को अब पहले से ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है।हालांकि, कारोबारियों का कहना है कि कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद बनारसी साड़ी की मांग बनी रहेगी, क्योंकि यह सिर्फ कपड़ा नहीं बल्कि वाराणसी की सदियों पुरानी कला और परंपरा की पहचान है।
बुनकरों को राहत मिलने की उम्मीद
बनारसी साड़ी उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि कीमत बढ़ने से बुनकरों को राहत मिलेगी और उन्हें अपनी मेहनत का बेहतर मूल्य मिल सकेगा। वाराणसी के हजारों परिवार इस कारोबार से जुड़े हुए हैं और उनकी आजीविका इसी पर निर्भर है।बनारसी साड़ी को देश-विदेश में खास पहचान हासिल है। इसकी महीन बुनाई, जरी का काम और पारंपरिक डिजाइन इसे अन्य साड़ियों से अलग बनाते हैं। ऐसे में कारोबारियों को उम्मीद है कि नई कीमतों के बाद भी इसकी लोकप्रियता पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।