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फिरोजाबाद में उर्मिला की बच्चों के भविष्य और संपत्ति के लिए लंबी लड़ाई

 

फिरोजाबाद में एक महिला उर्मिला ने अपने पति-पत्नी के झगड़ों के बीच अपने बच्चों के भविष्य और उनके ससुराल में संपत्ति का हक सुरक्षित करने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी है। उर्मिला का कहना है कि वह केवल अपने बच्चों के नाम पर ससुर से कुछ संपत्ति चाहती है, ताकि उनकी शिक्षा और भविष्य सुनिश्चित हो सके।

जानकारी के अनुसार, उर्मिला ने 10 अगस्त 2023 से लेकर 12 जून 2024 तक प्रशासन और शासन में लगातार 14 प्रार्थना पत्र दाखिल किए। इन पत्रों में उन्होंने बच्चों के अधिकार और संपत्ति में हिस्सेदारी सुनिश्चित करने की मांग की। उर्मिला का उद्देश्य केवल अपने बच्चों को न्याय दिलाना और उनके लिए आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना था।

स्थानीय लोग बताते हैं कि उर्मिला की यह लड़ाई किसी आम विवाद जैसी नहीं थी। पति-पत्नी के झगड़े के बीच भी उर्मिला ने लगातार सिस्टम के जरिए न्याय प्राप्त करने का प्रयास किया। उन्होंने प्रशासन, तहसील और अन्य सरकारी विभागों को पत्र लिखकर अपने बच्चों के नाम पर संपत्ति हक सुनिश्चित करने का अनुरोध किया।

वकीलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह मामला बच्चों के अधिकार और महिला सशक्तिकरण का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि कई बार महिलाएं अपने बच्चों के अधिकारों के लिए चुप रहती हैं, लेकिन उर्मिला ने हिम्मत दिखाते हुए कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया का सहारा लिया।

उर्मिला की कहानी यह भी दिखाती है कि परिवार के भीतर संपत्ति विवाद केवल वयस्कों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि बच्चों के भविष्य और उनकी सुरक्षा को भी प्रभावित करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी अन्य पार्टी को नुकसान पहुंचाना नहीं है, बल्कि केवल बच्चों के हित में न्याय सुनिश्चित करना है।

स्थानीय प्रशासन ने बताया कि उर्मिला द्वारा दाखिल किए गए प्रार्थना पत्रों की समीक्षा और जांच की जा रही है। अधिकारियों ने कहा कि बच्चों के हित में उचित निर्णय लिया जाएगा और उनकी सुरक्षा एवं संपत्ति अधिकार सुनिश्चित किए जाएंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि उर्मिला जैसी महिलाओं की पहल समाज में न्याय, महिला सशक्तिकरण और बच्चों के अधिकारों को बढ़ावा देती है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन और शासन के सहयोग से ऐसे मामलों में बच्चों और महिलाओं को सुरक्षित और न्यायपूर्ण समाधान मिल सकता है।

फिरोजाबाद की यह घटना स्थानीय समुदाय के लिए भी एक संदेश है कि बच्चों के हित और उनकी सुरक्षा के लिए लड़ाई जारी रखना जरूरी है। उर्मिला ने यह साबित किया कि कठिन परिस्थितियों में भी साहस और धैर्य के साथ न्याय की मांग की जा सकती है।

इस प्रकार, उर्मिला की लंबी लड़ाई न केवल उनके बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने में मददगार साबित हो रही है, बल्कि यह सामाजिक जागरूकता, महिला सशक्तिकरण और बच्चों के अधिकारों की दिशा में भी प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है।