UP School News: स्कूलों में बनानी होगी परिवहन सुरक्षा समिति, हाईकोर्ट सख्त; वैन संचालन में अभिभावकों की भूमिका जरूरी
उत्तर प्रदेश के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट के निर्देशों के बाद प्रदेश के सभी स्कूलों में परिवहन सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके तहत स्कूलों में परिवहन सुरक्षा समिति गठित करने और जिला स्तर पर स्कूल वाहन सुरक्षा समितियों की नियमित बैठकें कराने की बात कही गई है।
स्कूल बसों और वैन के संचालन में बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए स्कूल प्रबंधन, परिवहन विभाग, पुलिस और अभिभावकों की भूमिका तय किए जाने पर जोर है। स्कूल परिवहन से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए समितियों के गठन का प्रावधान पहले से भी विभिन्न दिशा-निर्देशों में मौजूद रहा है।
जिला स्तर की समितियों को नियमित बैठक के निर्देश
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने प्रदेश के सभी जिलों में गठित जिला स्कूल वाहन सुरक्षा समितियों को नियमित रूप से बैठक करने के निर्देश दिए हैं। इन बैठकों में स्कूल वाहनों की स्थिति, ड्राइवर और परिचालकों से जुड़े दस्तावेज, सुरक्षा मानकों और बच्चों के सुरक्षित आवागमन से जुड़े मामलों की समीक्षा की जा सकती है।
स्कूल परिवहन सुरक्षा से जुड़े दिशा-निर्देशों में वाहन के फिटनेस प्रमाणपत्र, बीमा, परमिट, प्रदूषण प्रमाणपत्र, ड्राइविंग लाइसेंस और फायर एक्सटिंग्विशर जैसे सुरक्षा इंतजामों की जांच का प्रावधान भी मिलता है।
स्कूल वैन को लेकर अभिभावकों की भूमिका
स्कूल वैन के संचालन को लेकर अभिभावकों की भागीदारी पर भी जोर दिया गया है। बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने वाली गाड़ियों की व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन के बीच स्पष्ट सहमति और जिम्मेदारी तय करने की जरूरत बताई गई है।
स्कूल परिवहन से संबंधित पुराने न्यायिक दिशा-निर्देशों में भी अभिभावकों को स्कूल वाहन की सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी में शामिल करने और उनकी शिकायतों व सुझावों पर विचार करने की व्यवस्था का उल्लेख है।
स्कूलों को सुरक्षा मानकों पर देना होगा ध्यान
स्कूल वाहनों में बच्चों की सुरक्षा के लिए वाहन की फिटनेस, ड्राइवर की वैधता और जरूरी सुरक्षा उपकरणों की जांच महत्वपूर्ण होगी। स्कूल स्तर पर परिवहन समिति का उद्देश्य बच्चों के सुरक्षित आवागमन से जुड़े मामलों की निगरानी करना है।
हाईकोर्ट के रुख के बाद स्कूल प्रबंधन और संबंधित विभागों पर इन सुरक्षा व्यवस्थाओं को गंभीरता से लागू करने की जिम्मेदारी बढ़ गई है। अभिभावक भी स्कूल वाहन की व्यवस्था को लेकर शिकायत या सुझाव संबंधित समिति के सामने रख सकेंगे।
बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने वाले वाहनों में सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करना अब स्कूल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों के लिए अहम जिम्मेदारी होगी।