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UP MLC Election: एक साल तैयारी के बाद कांग्रेस ने चुनाव से खींचे कदम, 2027 विधानसभा पर पूरा फोकस

 

उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों पर होने वाले एमएलसी चुनाव से कांग्रेस ने दूरी बना ली है। खास बात यह है कि पार्टी करीब एक साल से इन चुनावों की तैयारी कर रही थी। संभावित उम्मीदवारों के नाम पर मंथन से लेकर पर्यवेक्षक और समन्वयक नियुक्त करने तक की कवायद की गई थी। कई दावेदार तो करीब नौ महीने से अपने-अपने क्षेत्रों में प्रचार और मतदाताओं से संपर्क में जुटे हुए थे। इसके बावजूद अब कांग्रेस ने चुनाव में अपना कोई उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया है।

23 अक्टूबर को 11 सीटों पर मतदान

उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान होना है। इनमें पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। स्नातक सीटों में लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ और इलाहाबाद-झांसी शामिल हैं। वहीं शिक्षक सीटों में लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ, बरेली-मुरादाबाद और गोरखपुर-फैजाबाद शामिल हैं।

इन सीटों के चुनाव में आम विधानसभा चुनाव की तरह सभी मतदाता वोट नहीं डालते। संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में पंजीकृत स्नातक और शिक्षक मतदाता मतदान करते हैं। यही वजह है कि उम्मीदवार काफी पहले से मतदाता सूची और जनसंपर्क अभियान पर काम शुरू कर देते हैं।

करीब एक साल तक कांग्रेस ने की थी तैयारी

कांग्रेस ने पिछले साल अक्टूबर से ही इन चुनावों के लिए तैयारी शुरू कर दी थी। पार्टी की ओर से पर्यवेक्षक और समन्वयक नियुक्त किए गए थे। इसके अलावा चुनावी गतिविधियों की निगरानी के लिए कंट्रोल रूम भी बनाया गया था। कई संभावित उम्मीदवारों ने अपने क्षेत्रों में लंबे समय से प्रचार अभियान चला रखा था।

लेकिन अब पार्टी ने चुनाव से हटने का फैसला किया है। यूपी कांग्रेस की नवनियुक्त अध्यक्ष आराधना मिश्रा ने कहा है कि एमएलसी चुनाव नहीं लड़ने का निर्णय उनके प्रदेश अध्यक्ष बनने से पहले ही लिया जा चुका था। उनका कहना है कि पार्टी का पूरा ध्यान 2027 के विधानसभा चुनाव पर है।

सपा से टकराव से बचने की रणनीति

कांग्रेस के पीछे हटने की एक बड़ी वजह समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन के समीकरण को भी माना जा रहा है। एमएलसी चुनाव में कांग्रेस और सपा के बीच सीधा मुकाबला होने से दोनों दलों के बीच चुनावी तालमेल पर असर पड़ सकता था। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व ने इस चुनाव से दूरी बनाकर 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा के साथ गठबंधन को मजबूत रखने का रास्ता चुना है।

कांग्रेस अब अपने संगठनात्मक संसाधनों और राजनीतिक गतिविधियों को विधानसभा चुनाव की तैयारी में लगाने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। पार्टी पहले ही 2027 के चुनाव को लेकर प्रदेश में संगठन मजबूत करने और सीटों पर तैयारी की बात कह चुकी है।

दावेदारों के सामने अब निर्दलीय मैदान में उतरने का विकल्प

कांग्रेस के चुनाव से हटने के बाद उन नेताओं और संभावित उम्मीदवारों के सामने नई स्थिति पैदा हो गई है, जो लंबे समय से चुनाव की तैयारी कर रहे थे। पार्टी ने संकेत दिया है कि अगर ऐसे नेता निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ना चाहते हैं तो यह उनका व्यक्तिगत फैसला होगा। यानी कांग्रेस संगठन उन्हें पार्टी उम्मीदवार के तौर पर मैदान में नहीं उतारेगा।

कांग्रेस के पीछे हटने के बाद 11 सीटों का मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच माना जा रहा है। हालांकि कई निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में हैं। 7 अक्टूबर तक इन 11 सीटों के लिए 188 प्रत्याशियों ने नामांकन किया था।

2027 से पहले अहम सियासी परीक्षा

विधान परिषद का यह चुनाव उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले अहम माना जा रहा है। कांग्रेस ने फिलहाल एमएलसी चुनाव की बजाय विधानसभा चुनाव को प्राथमिकता दी है। अब देखना होगा कि करीब एक साल की तैयारियों के बाद चुनाव से बाहर होने का यह फैसला 2027 के लिए कांग्रेस की रणनीति को किस तरह प्रभावित करता है।