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यूपी सरकार के बजट खर्च की रफ्तार सुस्त, 6 महीने में सिर्फ 22.78% रकम खपी

 

उत्तर प्रदेश सरकार के बजट खर्च की रफ्तार सुस्त बनी हुई है। वित्तीय वर्ष के शुरुआती छह महीने बीतने के बावजूद प्रदेश सरकार अपने कुल बजट का महज 22.78 प्रतिशत ही खर्च कर सकी है। बजट के मुकाबले खर्च की यह धीमी गति सरकार के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। विकास योजनाओं, निर्माण कार्यों और विभिन्न विभागों के लिए जारी बजट का समय पर इस्तेमाल नहीं होने से योजनाओं की प्रगति प्रभावित होने की आशंका है।

छह महीने में खर्च का आंकड़ा

उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष के लिए बड़ा बजट पेश किया था। इसमें प्रदेश के विकास, बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और रोजगार से जुड़ी योजनाओं के लिए धनराशि का प्रावधान किया गया। लेकिन वित्तीय वर्ष के छह महीने बीतने तक कुल बजट का केवल 22.78 प्रतिशत हिस्सा ही खर्च हो सका है।

बजट खर्च की यह स्थिति बताती है कि सरकारी विभागों में योजनाओं के क्रियान्वयन और धनराशि के इस्तेमाल की गति अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। सरकार की ओर से बजट जारी किए जाने के बाद भी कई विभागों में खर्च की प्रक्रिया धीमी बनी हुई है। ऐसे में वित्तीय वर्ष के अंत तक निर्धारित बजट को खर्च करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

विकास योजनाओं पर असर की चिंता

सरकार के बजट में सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिए बड़ी रकम रखी जाती है। इन योजनाओं के लिए बजट का समय पर खर्च होना जरूरी है। यदि धनराशि का इस्तेमाल समय पर नहीं होता है तो विकास कार्यों में देरी हो सकती है।

इसके अलावा, सरकारी विभागों को आवंटित बजट का कम इस्तेमाल होने से योजनाओं की समीक्षा भी जरूरी हो जाती है। अधिकारियों को यह देखना होगा कि किन कारणों से बजट खर्च की रफ्तार धीमी है और किन योजनाओं में काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है।

विभागों के सामने खर्च बढ़ाने की चुनौती

वित्तीय वर्ष के शुरुआती छह महीने में 22.78 प्रतिशत बजट खर्च होने के बाद अब विभागों के सामने शेष अवधि में खर्च की गति बढ़ाने की चुनौती है। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि बजट में घोषित योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचे और विकास कार्य समय पर पूरे हों।

बजट खर्च की धीमी रफ्तार के पीछे प्रशासनिक मंजूरियों में देरी, योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधाएं और विभागीय प्रक्रियाएं जैसे कारण हो सकते हैं। हालांकि, इन कारणों की पुष्टि के लिए विभागवार आंकड़ों और सरकारी समीक्षा रिपोर्ट का इंतजार करना होगा।

वित्तीय वर्ष के अंत तक बढ़ सकता है खर्च

सरकारी बजट में खर्च अक्सर वित्तीय वर्ष के अंतिम महीनों में तेज होता है। ऐसे में आने वाले महीनों में बजट खर्च का आंकड़ा बढ़ने की संभावना रहती है। लेकिन यदि शुरुआत में खर्च की गति धीमी रही तो विभागों को निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने पड़ सकते हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार के सामने अब बजट के प्रभावी इस्तेमाल के साथ विकास योजनाओं को गति देने की चुनौती है। आने वाले महीनों में विभागों की प्रगति और बजट खर्च के आंकड़े बताएंगे कि सरकार इस चुनौती से किस तरह निपटती है।