हाथरस में 12 साल पुराने जानलेवा हमले के मामले में दो दोषी, 7-7 साल की सजा; 50-50 हजार जुर्माना
जिले में करीब 12 साल पुराने जानलेवा हमले के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने दो आरोपियों को दोषी करार देते हुए 7-7 साल के कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही दोनों दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। लंबे समय से चल रहे इस मुकदमे में अदालत के फैसले के बाद पीड़ित पक्ष को राहत मिली है। अभियोजन पक्ष ने मामले से जुड़े साक्ष्य और गवाह अदालत के सामने पेश किए, जिसके आधार पर दोनों आरोपियों को दोषी माना गया।
12 साल पहले हुआ था जानलेवा हमला
मामला करीब 12 साल पुराना है। आरोपियों पर एक व्यक्ति के साथ जानलेवा हमला करने का आरोप लगा था। घटना के बाद पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी।जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट अदालत में दाखिल की। इसके बाद मामले की सुनवाई लंबे समय तक चली। इस दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से गवाहों के बयान दर्ज कराए गए और घटना से जुड़े साक्ष्य पेश किए गए।
दोनों आरोपियों को 7-7 साल की कैद
अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद दोनों आरोपियों को दोषी माना। कोर्ट ने प्रत्येक दोषी को 7 साल के कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा दोनों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।अदालत के इस फैसले को पुराने मामले में पीड़ित पक्ष को मिला न्याय माना जा रहा है। 12 साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद दोषियों को सजा सुनाई गई।
अभियोजन की पैरवी से मिली सजा
मामले में अभियोजन पक्ष ने आरोपियों के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों को अदालत के सामने रखा। सुनवाई के दौरान घटना से जुड़े तथ्यों को विस्तार से प्रस्तुत किया गया।अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद फैसला सुनाया। दोष सिद्ध होने पर दोनों आरोपियों को कारावास और अर्थदंड की सजा दी गई।
पुराने मामलों में भी कार्रवाई जारी
इस फैसले से यह संदेश भी गया है कि गंभीर आपराधिक मामलों में मुकदमा लंबे समय तक चलने के बावजूद दोष साबित होने पर सजा हो सकती है। पुलिस और अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया।फिलहाल दोनों दोषियों को अदालत के आदेश के अनुसार सजा भुगतनी होगी। 12 साल पुराने जानलेवा हमले के मामले में आए इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद पूरी हुई है।