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गाजीपुर में पशुओं से लदी दो नावें पकड़ीं, 50 किमी पीछा करने के बाद टक्कर; तस्कर गंगा में कूदकर फरार

 

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में पशु तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के दौरान पुलिस और तस्करों के बीच नदी में करीब 50 किलोमीटर तक पीछा करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने पशुओं से लदी दो नावों को पकड़ लिया। पीछा करने के दौरान दोनों नावों में टक्कर हो गई, जिसमें एक नाविक घायल हो गया। वहीं अंधेरे का फायदा उठाकर नावों पर सवार कथित तस्कर गंगा नदी में कूदकर फरार हो गए।

जानकारी के अनुसार, पुलिस को गंगा नदी के रास्ते पशुओं की तस्करी किए जाने की सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने नदी में निगरानी बढ़ाई। इसी दौरान पुलिस को पशुओं से लदी दो संदिग्ध नावें दिखाई दीं। पुलिस टीम ने नावों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन नाविकों ने नाव की गति बढ़ा दी और वहां से भागने लगे।

इसके बाद पुलिस ने दोनों नावों का पीछा शुरू कर दिया। पुलिस और नावों के बीच करीब 50 किलोमीटर तक पीछा चलता रहा। इस दौरान अंधेरा भी हो गया, जिससे नदी में कार्रवाई और चुनौतीपूर्ण हो गई। पुलिस लगातार नावों को पकड़ने का प्रयास करती रही।

बताया जा रहा है कि पीछा करने के दौरान दोनों नावें आपस में टकरा गईं। टक्कर इतनी तेज थी कि एक नाविक घायल हो गया। इसके बाद पुलिस ने मौके का फायदा उठाते हुए दोनों नावों को अपने कब्जे में ले लिया। नावों की तलाशी लेने पर उनमें पशु लदे मिले।

कार्रवाई के दौरान नावों पर मौजूद कथित तस्करों ने पुलिस से बचने के लिए अंधेरे में गंगा नदी में छलांग लगा दी। पुलिस ने उन्हें पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन वे नदी के रास्ते भागने में सफल रहे। पुलिस अब फरार आरोपियों की पहचान और तलाश में जुटी है।

घायल नाविक को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है। वहीं पुलिस ने दोनों नावों को कब्जे में लेकर पशुओं को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में नावों के मालिकों और तस्करी से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गंगा नदी के रास्ते पशुओं की तस्करी को रोकने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। इस घटना के बाद नदी क्षेत्र में गश्त और बढ़ाई जा सकती है। पुलिस फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।

फिलहाल पुलिस ने नावों को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है। फरार तस्करों की गिरफ्तारी के बाद ही पशुओं को कहां ले जाया जा रहा था और इस नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं, इसकी पूरी जानकारी सामने आने की उम्मीद है।:::