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बारिश बनी मुसीबत: आगरा-दिल्ली हाईवे पर दिनभर लगा जाम, एंबुलेंस भी फंसी, ट्रैफिक पुलिस बेबस

 

मंगलवार को शहरवासियों को भारी बारिश के बाद ट्रैफिक जाम की दोहरी मार झेलनी पड़ी। आगरा-दिल्ली हाईवे पर जलभराव के कारण सुबह से ही जाम लगना शुरू हो गया, जो दिनभर बना रहा। आईएसबीटी से लेकर सिकंदरा तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। पांच मिनट की दूरी तय करने में लोगों को एक से डेढ़ घंटे का समय लग गया।

जलभराव के चलते हालात इतने खराब हो गए कि जाम में एंबुलेंस तक फंस गईं। एंबुलेंस चालक लगातार सायरन बजाकर राह मांगते रहे, लेकिन वाहनों की लंबी लाइन के कारण रास्ता नहीं मिल सका। इस दौरान मरीजों की हालत गंभीर बनी रही। स्थानीय लोगों ने बताया कि दोपहर से लेकर देर शाम तक एंबुलेंस जाम में घंटों फंसी रही, लेकिन उन्हें निकालने में ट्रैफिक पुलिस पूरी तरह विफल साबित हुई।

यातायात पुलिस की व्यवस्थाएं ध्वस्त

बारिश के बाद हाईवे पर हुए जलभराव से ट्रैफिक पुलिस की तमाम व्यवस्थाएं चरमरा गईं। पुलिसकर्मी मौके पर तो पहुंचे, लेकिन भारी भीड़ और अव्यवस्थित यातायात के चलते वे जाम खुलवाने में पूरी तरह नाकाम रहे। कई स्थानों पर लोगों को खुद ही ट्रैफिक नियंत्रित करते हुए देखा गया। लोगों में प्रशासन के खिलाफ नाराजगी दिखी और सोशल मीडिया पर भी यातायात विभाग की आलोचना होती रही।

रोजाना की समस्या बनी बारिश के बाद की जाम की स्थिति

स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह समस्या हर बार बारिश के बाद सामने आती है। आगरा-दिल्ली हाईवे पर जल निकासी की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। ऐसे में थोड़ी सी बारिश भी इस मुख्य मार्ग को ठप कर देती है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि जलभराव की स्थायी व्यवस्था की जाए, जिससे रोजमर्रा की इस परेशानी से निजात मिल सके।

व्यापारियों और दफ्तर जाने वालों को झेलनी पड़ी भारी परेशानी

ट्रैफिक जाम की वजह से न सिर्फ आम राहगीर बल्कि कार्यालय जाने वाले कर्मचारी, छात्र और व्यापारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई दुकानदार अपने प्रतिष्ठान समय पर नहीं खोल पाए, तो वहीं छात्र समय पर स्कूल-कॉलेज नहीं पहुंच सके। इस दौरान लोगों ने सड़कों पर खड़े होकर नाराजगी जताई और प्रशासन से मांग की कि स्मार्ट सिटी के नाम पर अगर करोड़ों खर्च हो रहे हैं तो कम से कम मुख्य मार्गों की जल निकासी व्यवस्था बेहतर की जाए।

प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में

आगरा नगर निगम और यातायात विभाग की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जलभराव की व्यवस्था दुरुस्त की जाती, तो यह स्थिति न बनती।