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मऊ में हत्या की सजा से बचने के लिए युवक ने रची मौत की साजिश, बकरे को चिता पर लिटाया और AI से बनाई तस्वीर

 

उत्तर प्रदेश के मऊ में हत्या के मामले में सजा से बचने के लिए एक युवक द्वारा अपनी मौत का झूठा सबूत तैयार करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि युवक ने खुद को मृत दिखाने के लिए ऐसी साजिश रची, जिससे पुलिस और अदालत को गुमराह किया जा सके। उसने कथित तौर पर बकरे को चिता पर लिटाया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से अपनी चिता पर लेटे होने की तस्वीर तैयार करवाई। इसके बाद श्मशान घाट और नगर पालिका से मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने की बात भी सामने आई है।

जानकारी के अनुसार, 10वीं पास राजू हत्या के एक मामले में सजा से बचना चाहता था। इसी उद्देश्य से उसने अपनी मौत की कहानी गढ़ी। आरोप है कि उसने खुद को मृत साबित करने के लिए अलग-अलग स्तर पर सबूत जुटाने की कोशिश की। इस पूरी साजिश के जरिए वह करीब 18 महीने तक पुलिस को गुमराह करता रहा।

AI से तैयार करवाई चिता पर लेटे होने की तस्वीर

मामले में सबसे चौंकाने वाली बात AI से तस्वीर तैयार करवाने की है। आरोप है कि राजू ने अपनी चिता पर लेटे होने जैसी तस्वीर बनवाई, ताकि उसके मृत होने की बात को विश्वसनीय बनाया जा सके। इसके अलावा, उसने कथित तौर पर बकरे को चिता पर लिटाकर अंतिम संस्कार जैसा दृश्य तैयार किया। इस तरह वास्तविक मृत्यु के बिना ही अपनी मौत का भ्रम पैदा करने की कोशिश की गई।

हालांकि, AI से बनाई गई तस्वीर अपने आप में किसी व्यक्ति की मृत्यु का प्रमाण नहीं होती। ऐसे मामलों में वास्तविक पहचान, मृत्यु से जुड़े दस्तावेज और अन्य परिस्थितियों की जांच महत्वपूर्ण होती है।

मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने का भी आरोप

राजू पर आरोप है कि उसने श्मशान घाट और नगर पालिका से मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाए। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल कथित तौर पर अदालत में खुद को मृत साबित करने के लिए किया गया। बताया गया है कि उसने अदालत में भी दस्तावेज जमा कराए, ताकि हत्या के मामले में कानूनी कार्रवाई से बच सके।

18 महीने तक पुलिस को करता रहा गुमराह

इस मामले में करीब 18 महीने तक पुलिस को गुमराह किए जाने की बात सामने आई है। यदि दस्तावेजों और तस्वीरों के जरिए किसी व्यक्ति की मौत का झूठा दावा किया गया है, तो इससे जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। मामले में दस्तावेजों की सत्यता और पूरी साजिश की भूमिका की जांच अहम होगी।

यह घटना दिखाती है कि AI से बनाई गई तस्वीरों और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके वास्तविकता को छिपाने की कोशिश की जा सकती है। ऐसे मामलों में डिजिटल साक्ष्यों और आधिकारिक रिकॉर्ड का सत्यापन बेहद जरूरी है।