यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अगले साल तक टल सकते हैं, विधानसभा चुनाव के साथ हो सकती है संभावित तारीख
उत्तर प्रदेश में साल 2026 में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अगले साल तक टल सकते हैं। चुनाव विशेषज्ञों और राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, राज्य में यूपी विधानसभा चुनाव 2027 में होने वाले हैं और इस कारण कई कयास लगाए जा रहे हैं कि पंचायत और विधानसभा चुनाव एक साथ आयोजित किए जा सकते हैं।
राज्य में पंचायत चुनाव टालने की मुख्य वजह राज्य चुनाव आयोग का गठन न होना और आरक्षण प्रक्रिया अधूरी रहना बताया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि पंचायत चुनाव में आरक्षण की प्रक्रिया पूरी किए बिना चुनाव कराना मुश्किल होगा। वहीं, राजनीतिक पार्टियों और उम्मीदवारों के लिए भी तैयारी और रणनीति तय करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पंचायत और विधानसभा चुनाव एक साथ होते हैं, तो यह राजनीतिक परिदृश्य और चुनावी रणनीतियों पर बड़ा असर डाल सकता है। पार्टियों को दोनों स्तरों पर उम्मीदवार तैयार करने और मतदाताओं तक संदेश पहुंचाने में अधिक मेहनत करनी होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि पंचायत चुनावों का विलंब स्थानीय प्रशासन और विकास कार्यों को प्रभावित कर सकता है। पंचायत चुनावों में देरी होने से ग्रामीण विकास परियोजनाओं, योजनाओं की निगरानी और स्थानीय नेतृत्व की जवाबदेही पर असर पड़ सकता है।
सरकारी सूत्रों ने बताया कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट और राज्य चुनाव आयोग के दिशा-निर्देश का भी ध्यान रखा जा रहा है। आयोग और प्रशासन मिलकर यह तय करेंगे कि पंचायत चुनावों की तारीख और विधानसभा चुनावों का समन्वय किस प्रकार से किया जा सकता है।
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया भी इस संभावित विलंब पर मिलीजुली रही है। कुछ दल एक साथ चुनाव कराने के पक्ष में हैं क्योंकि इससे चुनाव प्रचार और संसाधनों का समन्वय आसान हो जाता है। वहीं, कुछ दल विभाजित चुनावों के पक्ष में हैं, ताकि स्थानीय मुद्दों पर अधिक ध्यान दिया जा सके और पंचायत स्तर पर अपना प्रभाव बढ़ाया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की तिथि राजनीतिक स्थिरता, प्रशासनिक तैयारियों और चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगी। यदि चुनाव विलंबित होते हैं, तो राजनीति और प्रशासन दोनों पर इसका असर देखा जाएगा।
इस प्रकार, उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अगले साल तक टलने की संभावना और उनके विधानसभा चुनाव के साथ समन्वय पर राजनीतिक और प्रशासनिक निगाहें टिकी हुई हैं। अब यह देखना बाकी है कि राज्य चुनाव आयोग और सरकार चु