धार्मिक न्यास समिति में होंगे तीन बड़े संत शामिल! शंकराचार्य, माध्वाचार्य और युगपुरुष को पदेन सदस्य बनाने की तैयारी
धार्मिक न्यास समिति के पुनर्गठन को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। 22 जुलाई को हुई बैठक में समिति के पुनर्गठन का फैसला लिया गया था, लेकिन संतों के बीच प्रस्तावित नामों को लेकर आम सहमति नहीं बन सकी। इसी वजह से समिति में शामिल किए जाने वाले तीन अतिरिक्त सदस्यों के नामों की घोषणा उस समय नहीं हो पाई थी। अब इन पदों को लेकर एक नया प्रस्ताव सामने आया है, जिसके तहत तीन प्रमुख संतों को पदेन सदस्य बनाए जाने पर विचार किया जा सकता है।
नामों पर नहीं बन पाई थी सहमति
बताया जा रहा है कि धार्मिक न्यास समिति के पुनर्गठन की प्रक्रिया के दौरान संत समाज के बीच अतिरिक्त सदस्यों के नामों को लेकर सहमति बनाने का प्रयास किया गया था। हालांकि, अलग-अलग संतों और प्रतिनिधियों की राय अलग होने के कारण तीन नामों पर अंतिम निर्णय नहीं हो सका। इसके चलते समिति के गठन की घोषणा तो कर दी गई, लेकिन अतिरिक्त तीन सदस्यों के नाम रोक दिए गए।
अब समिति में इन तीन पदों को लेकर नए विकल्प पर विचार किया जा रहा है। प्रस्ताव के अनुसार किसी व्यक्ति विशेष के चयन के बजाय प्रमुख धार्मिक पीठों और संत परंपराओं का प्रतिनिधित्व करने वाले संतों को पदेन सदस्य बनाया जा सकता है।
शंकराचार्य और माध्वाचार्य का नाम चर्चा में
नए प्रस्ताव में शंकराचार्य, माध्वाचार्य और युगपुरुष को पदेन सदस्य बनाए जाने की संभावना जताई जा रही है। यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है तो धार्मिक न्यास समिति में देश की प्रमुख संत परंपराओं का प्रतिनिधित्व बढ़ सकता है।
शंकराचार्य और माध्वाचार्य भारतीय धार्मिक परंपरा में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। वहीं युगपुरुष को भी संत समाज में प्रभावशाली धार्मिक व्यक्तित्व के तौर पर देखा जाता है। इन संतों को समिति से जोड़ने का उद्देश्य धार्मिक मामलों में अनुभवी और प्रतिष्ठित संतों की भागीदारी सुनिश्चित करना माना जा रहा है।
अंतिम फैसला अभी बाकी
हालांकि, तीनों संतों को पदेन सदस्य बनाने को लेकर अभी अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। समिति के पुनर्गठन और सदस्यों के चयन से जुड़ी प्रक्रिया में आगे होने वाली बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है।
अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो लंबे समय से लंबित तीन अतिरिक्त सदस्यों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो सकता है। साथ ही समिति में संत समाज की भागीदारी को लेकर भी एक नया स्वरूप सामने आएगा। फिलहाल सभी की नजरें आगामी बैठक और सरकार या संबंधित धार्मिक न्यास प्राधिकरण के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं।