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 जन्म से ही गर्भवती होता है ये जीव, प्रकृति ने बनाया है इसे पौधों का दुश्मन

 

एफिड्स (Aphids) छोटे लेकिन बेहद दिलचस्प कीट होते हैं, जो पौधों पर पत्तियों और कोमल हिस्सों का रस चूसकर उन्हें नुकसान पहुंचाते हैं। इन्हें आम तौर पर पौधों के “कीट-शत्रु” के रूप में जाना जाता है, क्योंकि ये तेजी से फसल और बागवानी को प्रभावित कर सकते हैं।

इनकी सबसे अनोखी विशेषता इनका प्रजनन तरीका है। कई परिस्थितियों में एफिड्स बिना नर (male) के ही प्रजनन कर सकते हैं, जिसे जैविक रूप में पार्थेनोजेनेसिस (parthenogenesis) कहा जाता है। इसका मतलब है कि मादा एफिड्स सीधे बच्चे पैदा कर सकती हैं, बिना निषेचन के।

और भी दिलचस्प बात यह है कि कुछ एफिड्स में “टेलीस्कोपिंग जनरेशन” (telescoping generations) पाई जाती है। इसका मतलब है कि एक मादा एफिड के शरीर के अंदर ही अगली पीढ़ी विकसित हो रही होती है, और कभी-कभी उस अगली पीढ़ी के अंदर भी तीसरी पीढ़ी मौजूद होती है। यानी एक ही समय में कई पीढ़ियां एक-दूसरे के भीतर विकसित हो रही होती हैं।

इसी वजह से एफिड्स बहुत तेजी से अपनी संख्या बढ़ा लेते हैं। अनुकूल मौसम और भोजन मिलने पर इनकी आबादी कुछ ही दिनों में हजारों तक पहुंच सकती है। यही कारण है कि ये कृषि और बागवानी के लिए चुनौती बन जाते हैं।

हालांकि, प्रकृति में एफिड्स को “दुश्मन” नहीं बल्कि एक खाद्य श्रृंखला (food chain) का हिस्सा माना जाता है। कई लाभकारी कीट जैसे लेडीबर्ड (ladybirds) और कुछ ततैया (wasps) इन पर नियंत्रण रखते हैं और इनकी संख्या को संतुलित करते हैं।

संक्षेप में, एफिड्स अपने अनोखे और तेज प्रजनन तंत्र के कारण वैज्ञानिक दृष्टि से बेहद रोचक हैं, लेकिन कृषि के संदर्भ में इन्हें नियंत्रित करना जरूरी होता है ताकि फसलों को नुकसान से बचाया जा सके।