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बसपा में आईटी सेल को लेकर मचा घमासान, समर्थकों ने आकाश आनंद के बयान पर जताई नाराजगी

 

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के चीफ नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद के उस बयान से पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक खासे नाराज नजर आ रहे हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि बसपा का कोई आईटी सेल नहीं है। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर पार्टी समर्थकों ने आकाश आनंद से आईटी सेल बनाने की मांग उठानी शुरू कर दी है।

क्यों बढ़ा विवाद?

दरअसल, बीते दिनों आकाश आनंद ने एक सार्वजनिक मंच से कहा था कि बसपा का कोई आईटी सेल नहीं है और पार्टी धरातल पर जनसंपर्क और संगठन विस्तार में विश्वास रखती है। इस बयान से बसपा के वे समर्थक असहमत दिखे जो सोशल मीडिया पर पार्टी की विचारधारा को बढ़ाने और विपक्षी दलों का जवाब देने में लगातार सक्रिय रहे हैं।

समर्थकों ने जताई नाराजगी

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, विशेष रूप से ट्विटर और फेसबुक पर, बसपा समर्थकों ने #BSP_IT_Cell_जरूरी_है जैसे हैशटैग के साथ पोस्ट कर आईटी सेल की स्थापना की जरूरत पर जोर दिया है। उनका कहना है कि डिजिटल दौर में जब हर राजनीतिक दल सोशल मीडिया के माध्यम से राय बनाने और चुनावी रणनीति चलाने में जुटा है, तब बसपा को भी पीछे नहीं रहना चाहिए।

क्या बोले कार्यकर्ता?

कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि बसपा की नीतियों और बहन मायावती की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के लिए डिजिटल माध्यम अनिवार्य हो गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अन्य पार्टियों के पास संगठित आईटी सेल हैं, जो तुरंत हर राजनीतिक मुद्दे पर प्रतिक्रियाएं देते हैं, तो बसपा क्यों चुप रहती है?

एक सक्रिय समर्थक ने लिखा, "हमने सालों से बिना किसी संसाधन के सोशल मीडिया पर बसपा का पक्ष रखा है, अब वक्त है कि पार्टी हमें संगठित समर्थन दे।"

आगामी चुनावों को लेकर बढ़ी चिंता

उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में आगामी विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। ऐसे में समर्थकों को डर है कि अगर बसपा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय नहीं हुई, तो चुनावी मैदान में विपक्षी दलों के प्रचार तंत्र के सामने कमजोर पड़ सकती है। सोशल मीडिया अब न केवल प्रचार का माध्यम है, बल्कि वह राय निर्माण और युवा वर्ग तक पहुंचने का सबसे प्रभावशाली जरिया बन चुका है।

पार्टी नेतृत्व पर दबाव

इन नाराजगी भरे सुरों के बीच, बसपा नेतृत्व पर यह दबाव बनता जा रहा है कि वह पार्टी की रणनीति में सोशल मीडिया को भी अहम स्थान दे। हालांकि अब तक पार्टी की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन यह स्पष्ट है कि कार्यकर्ताओं और समर्थकों की अपेक्षाएं अब बदल चुकी हैं।