यूपी के संस्थानों में भी एनसीए जैसी सुविधा की मांग, बुजुर्गों को एक ही छत के नीचे मिले इलाज
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने उत्तर प्रदेश के संस्थानों में बुजुर्गों के लिए बेहतर और सुविधाजनक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। परिषद ने अपने मांग पत्र में कहा है कि बुजुर्गों को इलाज के लिए अलग-अलग विभागों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए एनसीए (NCA) जैसी व्यवस्था प्रदेश के संस्थानों में भी लागू की जा सकती है।
परिषद के मुताबिक, एनसीए में वृद्धजनों के लिए एक ही छत के नीचे जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य बुजुर्ग मरीजों को इलाज के लिए अस्पताल के अलग-अलग विभागों में जाने की परेशानी से बचाना है।
मांग पत्र में कहा गया है कि उम्र बढ़ने के साथ बुजुर्गों को अक्सर एक से अधिक स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज की जरूरत पड़ती है। ऐसे में उन्हें अलग-अलग विशेषज्ञों से परामर्श लेने के लिए अस्पताल के विभिन्न विभागों में जाना पड़ता है। इससे बुजुर्ग मरीजों को शारीरिक परेशानी के साथ समय और संसाधनों की भी अतिरिक्त जरूरत पड़ती है।
परिषद ने सुझाव दिया है कि उत्तर प्रदेश के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में भी एनसीए की तर्ज पर ऐसी समेकित चिकित्सा व्यवस्था विकसित की जा सकती है। इससे बुजुर्गों को एक ही स्थान पर विभिन्न प्रकार की जांच, विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह और जरूरी उपचार की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद का कहना है कि ऐसी व्यवस्था लागू होने से वृद्ध मरीजों और उनके परिजनों को काफी राहत मिलेगी। खासतौर पर उन बुजुर्गों के लिए यह सुविधा उपयोगी साबित हो सकती है, जिन्हें एक साथ कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
परिषद ने अपने मांग पत्र में इस व्यवस्था को प्रदेश के प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों में लागू करने पर विचार करने की अपील की है। संगठन का मानना है कि बुजुर्गों के लिए अलग और समेकित चिकित्सा सुविधा विकसित करना स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुगम और मरीज केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
अब परिषद की इस मांग पर सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर नजर रहेगी। यदि एनसीए जैसी व्यवस्था प्रदेश के संस्थानों में लागू होती है तो बुजुर्गों को इलाज के लिए अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने से काफी हद तक राहत मिल सकती है।