यूपी सरकार ने ग्रामीण निकायों के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया, राम औतार सिंह होंगे अध्यक्ष
उत्तर प्रदेश में ग्रामीण विकास और सामाजिक न्याय को मजबूत बनाने के उद्देश्य से योगी सरकार ने एक नया पिछड़ा वर्ग आयोग गठित किया है। यह आयोग राज्य के स्थानीय ग्रामीण निकायों से जुड़े मामलों पर सलाह देगा और पिछड़े वर्गों के हितों की रक्षा के लिए नीतियां सुझाएगा।
अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति
आयोग के अध्यक्ष के रूप में इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज राम औतार सिंह को नियुक्त किया गया है। इसके अलावा आयोग में सेवानिवृत्त अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (ADJ) ब्रजेश कुमार और संतोष विश्वकर्मा को सदस्य बनाया गया है। साथ ही, सेवानिवृत्त IAS अधिकारी अरविंद चौरसिया और S.P. सिंह भी आयोग के सदस्य होंगे।
सरकार का कहना है कि यह आयोग ग्रामीण निकायों में पिछड़ा वर्ग के सामाजिक और आर्थिक अधिकारों की निगरानी करेगा। आयोग की रिपोर्ट और सुझावों के आधार पर राज्य सरकार नीति और कार्यक्रमों में सुधार करेगी।
आयोग के मुख्य उद्देश्य
- पिछड़े वर्गों के हितों की रक्षा: ग्रामीण स्तर पर आरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार संबंधी मुद्दों पर ध्यान देना।
- नीति निर्माण में मार्गदर्शन: ग्रामीण निकायों में पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिशों के आधार पर योजनाओं का क्रियान्वयन।
- संपर्क और निगरानी: स्थानीय निकायों में पिछड़े वर्गों को मिलने वाले लाभ और अधिकारों का नियमित मूल्यांकन।
- समाज जागरूकता: ग्रामीण समुदायों में पिछड़े वर्ग के अधिकारों के प्रति जन जागरूकता बढ़ाना।
सरकारी बयान
उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा कि आयोग का गठन समाज में समानता और विकास को बढ़ावा देने के लिए किया गया है। योगी सरकार का कहना है कि पिछड़ा वर्ग आयोग ग्रामीण क्षेत्रों में नीति निर्माण और क्रियान्वयन में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद करेगा।
विशेषज्ञों का दृष्टिकोण
सामाजिक कार्यकर्ताओं और नीति विशेषज्ञों का मानना है कि पिछड़ा वर्ग आयोग ग्रामीण विकास और सामाजिक न्याय को सुदृढ़ करने का एक महत्वपूर्ण कदम है। आयोग के सक्रिय होने से पिछड़े वर्ग के शैक्षिक और आर्थिक विकास में सुधार की संभावना बढ़ सकती है।