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अयोध्या में सावन झूलन उत्सव का हुआ समापन, श्रीराम-सीता के झूलों की भव्य छटा ने मोहा मन

 

रामनगरी अयोध्या में सावन शुक्ल तृतीया से शुरू हुआ भगवान श्रीराम, माता सीता समेत विभिन्न आराध्य स्वरूपों का पारंपरिक झूलन उत्सव सावन पूर्णिमा के साथ श्रद्धा और उल्लास से संपन्न हो गया। 28 अगस्त की रात देर तक अयोध्या के मंदिरों में झूलन उत्सव की भव्य छटा देखने को मिली। मंदिरों में सजे आकर्षक झूलों पर विराजमान आराध्य स्वरूपों के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। संतों और श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन के बीच भगवान के झूलन उत्सव का आनंद लिया।

सावन के महीने में अयोध्या के मंदिरों में झूलन उत्सव की विशेष परंपरा रही है। इस दौरान भगवान श्रीराम और माता सीता समेत अन्य देवी-देवताओं के विग्रहों को फूलों से सजे झूलों पर विराजमान कराया जाता है। मंदिरों में प्रतिदिन विशेष पूजा-अर्चना के साथ भजन और संकीर्तन होते हैं। सावन पूर्णिमा के दिन इस उत्सव का विशेष समापन समारोह आयोजित किया जाता है।

मंदिरों में देर रात तक दिखी भव्य सजावट

28 अगस्त की रात अयोध्या के विभिन्न मंदिरों में झूलन उत्सव की रौनक देखते ही बनी। रंग-बिरंगे फूलों और आकर्षक सजावट से मंदिर परिसर सजे हुए थे। झूलों पर विराजमान भगवान के मनोहारी स्वरूप श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने रहे।

श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचकर आराध्य के दर्शन करते रहे और भजन-कीर्तन में शामिल हुए। कई मंदिरों में देर रात तक धार्मिक कार्यक्रम चलते रहे। पूरे वातावरण में भक्ति और उल्लास का माहौल बना रहा।

संतों और श्रद्धालुओं ने लिया हिस्सा

झूलन उत्सव में अयोध्या के संत-महंतों के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। संतों ने भगवान के झूलन उत्सव की धार्मिक और आध्यात्मिक परंपरा का महत्व बताया। भजन और संकीर्तन के दौरान श्रद्धालु भगवान के जयकारे लगाते रहे।

इस दौरान मंदिरों में विशेष प्रसाद और पूजा-अर्चना की व्यवस्था भी की गई। श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना के साथ आराध्य स्वरूपों के दर्शन किए।

सावन पूर्णिमा पर हुआ समापन

सावन शुक्ल तृतीया से शुरू हुआ पारंपरिक झूलन उत्सव सावन पूर्णिमा के साथ संपन्न हुआ। पूरे सावन महीने अयोध्या के मंदिरों में इस उत्सव की अलग ही रौनक देखने को मिली। हर दिन श्रद्धालुओं ने भगवान के अलग-अलग श्रृंगार और झूलन स्वरूप के दर्शन किए।

झूलन उत्सव के समापन के साथ मंदिरों में चल रहे विशेष आयोजनों का भी समापन हुआ। सावन पूर्णिमा की रात तक रामनगरी भक्ति के रंग में डूबी रही। मंदिरों से गूंजते भजन, कीर्तन और भगवान के जयकारों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

रामनगरी की यह सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा श्रद्धालुओं के लिए आस्था और आनंद का विशेष अवसर होती है। सावन झूलन उत्सव के समापन पर भी अयोध्या में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला।