उत्तर प्रदेश में कानून का शासन पूरी तरह ध्वस्त
नई दिल्ली, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून का शासन पूरी तरह से खत्म हो चुका है। सिविल मामलों में राज्य पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के बाद सीजेआई ने कहा, "उत्तर प्रदेश में कानून का शासन पूरी तरह से खत्म हो चुका है। सिविल मामले को आपराधिक मामले में बदलना स्वीकार्य नहीं है।" एक वकील ने कहा कि सिविल विवादों को निपटाने में लंबा समय लगता है, इसलिए एफआईआर दर्ज की गई है। सीजेआई ने कहा, "यूपी में जो हो रहा है, वह गलत है। हर रोज सिविल मामलों को आपराधिक मामलों में बदला जा रहा है। यह बेतुका है, सिर्फ पैसे न देने को अपराध नहीं बनाया जा सकता।" सीजेआई ने कहा, "हम आईओ को गवाह के कठघरे में आने का निर्देश देंगे। आईओ को गवाह के कठघरे में खड़े होकर आपराधिक मामला बनाने दें...यह चार्जशीट दाखिल करने का तरीका नहीं है।" आईओ को सबक सीखने दें। पीठ ने आगे पूछा, "सिर्फ इसलिए कि सिविल मामलों में लंबा समय लगता है, आप एफआईआर दर्ज करेंगे और आपराधिक कानून लागू करेंगे?" नोएडा के सेक्टर-39 स्थित संबंधित पुलिस स्टेशन के आईओ को शीर्ष अदालत ने निचली अदालत में गवाह के रूप में उपस्थित होने और मामले में एफआईआर दर्ज करने को उचित ठहराने का निर्देश दिया।
पीठ आरोपी देबू सिंह और दीपक सिंह की चिका पर नवाई कर रही थी, जो वकील चांद कुरैशी के माध्यम से इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा उनके खिलाफ आपराधिक मामला रद्द करने से इनकार करने के खिलाफ दायर की गई थी। शीर्ष अदालत ने नोएडा की निचली अदालत में याचिकाकर्ताओं के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगा दी, लेकिन कहा कि उनके खिलाफ चेक बाउंस का मामला जारी रहेगा।