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नाबालिग बच्चे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी सिर्फ पिता की नहीं, माता-पिता दोनों को देना होगा योगदान

 

हाईकोर्ट ने नाबालिग बच्चे के भरण-पोषण से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि बच्चे के पालन-पोषण की पूरी जिम्मेदारी केवल पिता पर नहीं डाली जा सकती। माता-पिता दोनों को अपनी आय और आर्थिक क्षमता के अनुसार बच्चे के भरण-पोषण तथा उससे जुड़े अन्य खर्चों में योगदान करना होता है।

अदालत ने कहा कि नाबालिग बच्चे की जरूरतों को पूरा करना माता-पिता की साझा जिम्मेदारी है। इसमें बच्चे की शिक्षा, भोजन, कपड़े, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी खर्च शामिल हो सकते हैं। इन खर्चों को पूरा करने के लिए माता-पिता की आर्थिक स्थिति और उनकी आय को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

हाईकोर्ट के समक्ष याचिका पर सुनवाई के दौरान बच्चे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठा था। मामले में इस बात पर विचार किया गया कि क्या बच्चे के सभी खर्चों का भार केवल पिता पर डाला जा सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि परिस्थितियों के आधार पर माता-पिता दोनों को अपनी आर्थिक क्षमता के अनुरूप योगदान देना चाहिए।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बच्चे के हित और उसकी जरूरतें सबसे महत्वपूर्ण हैं। माता-पिता की आय और आर्थिक स्थिति अलग-अलग होने की स्थिति में योगदान भी उसी अनुपात में तय किया जा सकता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे की आवश्यक जरूरतों और विकास पर प्रतिकूल असर न पड़े।

कोर्ट की यह टिप्पणी उन मामलों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जहां माता-पिता के बीच बच्चे के भरण-पोषण को लेकर विवाद होता है। अदालत ने साझा जिम्मेदारी के सिद्धांत पर जोर देते हुए कहा कि बच्चे की देखभाल केवल एक अभिभावक की जिम्मेदारी नहीं मानी जा सकती। माता-पिता को अपनी क्षमता के अनुसार बच्चे के पालन-पोषण में सहयोग करना होगा।