विदेश कमाने गया था इकलौता बेटा, रूस की मिसाइल ने ली जान; अभिषेक की मौत से परिवार में मचा कोहराम
उत्तर प्रदेश के देवरिया के रहने वाले अभिषेक निषाद का परिवार बेटे के विदेश जाकर बेहतर भविष्य बनाने को लेकर बेहद खुश था। इकलौता बेटा नौ महीने के अनुबंध पर टर्की के एक शिप पर नौकरी करने के लिए मुंबई के एजेंट के जरिए विदेश गया था। परिवार को उम्मीद थी कि अभिषेक मेहनत कर अच्छी कमाई करेगा और घर की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी। लेकिन परिवार की खुशियां उस समय मातम में बदल गईं, जब यूक्रेन के पास मालवाहक जहाज पर रूसी मिसाइल हमला हुआ और अभिषेक समेत चार भारतीयों की मौत हो गई।
नौ महीने के कॉन्ट्रैक्ट पर गया था विदेश
अभिषेक विदेश में काम करके परिवार का सहारा बनना चाहता था। नौ महीने के अनुबंध पर उसे टर्की के एक मालवाहक जहाज पर काम मिला था। मुंबई के एक एजेंट के माध्यम से विदेश जाने के बाद परिवार को उम्मीद थी कि बेटे का करियर बेहतर होगा।
पिता को अपने इकलौते बेटे से काफी उम्मीदें थीं। परिवार के लिए अभिषेक का विदेश जाना किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं था। लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि जिस बेटे को बेहतर भविष्य के सपने के साथ विदेश भेजा गया है, वह युद्ध की चपेट में आ जाएगा।
19 जुलाई को हुआ मिसाइल हमला
19 जुलाई को टर्की से यूक्रेन पहुंचे एक मालवाहक जहाज पर रूसी मिसाइल हमला हुआ। जहाज पर कुल 17 लोग सवार थे। हमले में चार भारतीय नागरिकों समेत कई लोगों की मौत हो गई। अभिषेक भी इस हमले की चपेट में आ गए। रिपोर्ट के मुताबिक, वह इंजन रूम में काम कर रहे थे और हमले के दौरान वहीं फंस गए।
हमले में अभिषेक का शव बुरी तरह जल गया, जिसके कारण उसकी पहचान करने में मुश्किल आई। परिवार के लिए यह खबर किसी सदमे से कम नहीं थी। जिस बेटे के सुरक्षित लौटने का इंतजार था, उसकी मौत की खबर ने पूरे परिवार को तोड़ दिया।
शव की पहचान में भी आई परेशानी
अभिषेक समेत चार भारतीयों के शव स्वदेश लाने की प्रक्रिया भी आसान नहीं रही। पहचान से जुड़ी औपचारिकताओं और डीएनए जांच के कारण शवों की वापसी में देरी हुई। परिवार की ओर से अभिषेक के माता-पिता का डीएनए सैंपल भी उपलब्ध कराया गया।
भारतीय दूतावास ने परिवार से संपर्क कर शव की वापसी की प्रक्रिया की जानकारी दी थी। परिवार लगातार बेटे के अंतिम दर्शन और उसके शव के घर पहुंचने का इंतजार करता रहा।
परिवार को थी बेटे से बड़ी उम्मीद
अभिषेक के विदेश जाने पर परिवार में खुशी का माहौल था। पिता को उम्मीद थी कि उनका बेटा विदेश में काम करके परिवार के सपनों को पूरा करेगा। लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध की चपेट में आने से परिवार का यह सपना हमेशा के लिए टूट गया।
अभिषेक की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि युद्धग्रस्त क्षेत्रों में काम करने वाले भारतीय समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा कितनी चुनौतीपूर्ण हो गई है। उनके परिवार अब केवल अपने बेटे के पार्थिव शरीर के घर लौटने और अंतिम संस्कार का इंतजार कर रहे हैं।