☰
×

कांग्रेस से सपा को मिली सीटों की सूची, आजम खां की राय से घोषित होंगे प्रत्याशी; अखिलेश यादव ने बनाई चुनावी रणनीति

 

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे की कवायद तेज होती नजर आ रही है। इसी बीच कांग्रेस की ओर से सीटों की सूची सौंपे जाने और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा प्रत्याशियों के चयन में वरिष्ठ नेता आजम खां की राय को महत्व दिए जाने की चर्चा राजनीतिक हलकों में सुर्खियों में है। दोनों दलों के बीच सीटों को लेकर बातचीत और उम्मीदवारों के चयन को आगामी चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

कांग्रेस ने सपा को सौंपी 172 सीटों की सूची

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश की 172 विधानसभा सीटों पर अपनी दावेदारी पेश करते हुए सपा को सूची सौंपी है। कांग्रेस की रणनीति में उन सीटों को प्राथमिकता दिए जाने की बात कही जा रही है, जहां पार्टी अपनी मजबूत स्थिति मानती है। रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस अपनी ए-कैटेगरी की सीटों पर समझौता करने के पक्ष में नहीं है।

हालांकि, सीटों की सूची सौंपे जाने का मतलब यह नहीं है कि दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे पर अंतिम सहमति बन गई है। सीटों की संख्या, क्षेत्रवार दावेदारी और संभावित प्रत्याशियों को लेकर दोनों पार्टियों के बीच आगे बातचीत होना महत्वपूर्ण होगा। अंतिम निर्णय दोनों दलों के नेतृत्व की सहमति के बाद ही स्पष्ट होगा।

आजम खां की राय से तय होंगे प्रत्याशी

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां भी आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। हालिया मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि आजम खां ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 15 विधानसभा सीटों के लिए अपनी पसंद के संभावित प्रत्याशियों के नाम पार्टी नेतृत्व तक पहुंचाए हैं।

इन सीटों पर उम्मीदवारों के चयन में स्थानीय राजनीतिक समीकरण, पार्टी का जनाधार और प्रत्याशियों की जीत की संभावनाएं अहम भूमिका निभा सकती हैं। रामपुर और आसपास के क्षेत्रों में आजम खां के लंबे राजनीतिक अनुभव को देखते हुए उनकी राय को महत्व दिए जाने की चर्चा है।

हालांकि, संभावित उम्मीदवारों की सूची को पार्टी की आधिकारिक प्रत्याशी सूची नहीं माना जाना चाहिए। अंतिम नामों की घोषणा सपा नेतृत्व द्वारा ही की जाएगी।

अखिलेश यादव के सामने गठबंधन की चुनौती

उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर होने वाले चुनाव से पहले सपा और कांग्रेस के सामने सीटों के बंटवारे पर सहमति बनाना एक महत्वपूर्ण चुनौती है। दोनों दलों को अपने संगठनात्मक हितों के साथ गठबंधन की संभावनाओं का भी ध्यान रखना होगा।

अखिलेश यादव पहले भी सीटों की संख्या के बजाय गठबंधन की जीत को प्राथमिकता देने की बात कह चुके हैं। ऐसे में प्रत्याशियों की स्थानीय लोकप्रियता, चुनावी प्रदर्शन और क्षेत्रीय समीकरणों के आधार पर सीटों पर फैसला किए जाने की संभावना है।

अब आधिकारिक घोषणा का इंतजार

फिलहाल राजनीतिक गतिविधियों के बीच कांग्रेस की दावेदारी और आजम खां की पसंद के संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चाएं जारी हैं। हालांकि, सीट बंटवारे पर अंतिम समझौते और सभी प्रत्याशियों के नामों की आधिकारिक पुष्टि होने तक तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं होगी।

आने वाले दिनों में सपा और कांग्रेस के बीच होने वाली बातचीत यह तय करने में महत्वपूर्ण होगी कि किन सीटों पर कौन-सी पार्टी चुनाव लड़ेगी और उम्मीदवारों के चयन में किन नेताओं की राय को प्राथमिकता मिलेगी।