20 साल से बंद पड़ी हरिवंश राय बच्चन के नाम की लाइब्रेरी, KBC में अमिताभ ने मांगी माफी; वीडियो में बोले- जल्द शुरू होगी
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में महान कवि हरिवंश राय बच्चन के नाम पर बनी लाइब्रेरी करीब 20 साल बाद भी किताबों और नियमित संचालन का इंतजार कर रही है। बाबूपट्टी गांव में बनी इस लाइब्रेरी बिल्डिंग का लोकार्पण वर्ष 2006 में जया बच्चन ने किया था। उस समय बच्चन परिवार की ओर से गांव से जुड़ाव और लाइब्रेरी को लेकर उम्मीदें जगी थीं, लेकिन लंबे समय बाद भी यह सुविधा पूरी तरह शुरू नहीं हो सकी।बताया जाता है कि लोकार्पण के दौरान जया बच्चन ने परिवार के साथ गांव आने का वादा भी किया था। हालांकि, यह वादा अब तक पूरा नहीं हो सका। हाल ही में कौन बनेगा करोड़पति के मंच पर इस मुद्दे का जिक्र हुआ तो अमिताभ बच्चन ने बाबूपट्टी और प्रतापगढ़ के लोगों से माफी मांगी।
बाबूपट्टी का नाम सुनते ही भावुक हुए अमिताभ
KBC के मंच पर बाबूपट्टी का नाम सुनते ही अमिताभ बच्चन ने अपने परिवार और गांव से जुड़े पुराने रिश्ते को याद किया। उन्होंने बताया कि बाबूपट्टी उनके पूर्वजों का जन्मस्थान रहा है और उनके पिता हरिवंश राय बच्चन भी वहीं से आए थे।अमिताभ बच्चन ने कहा कि परिवार की इच्छा थी कि गांव में कुछ किया जाए, लेकिन इस काम में रुकावट आ गई। उन्होंने माना कि इस वजह से वहां के लोग नाराज हैं।
अमिताभ बोले- प्रतापगढ़ के लोगों से माफी चाहते हैं
अमिताभ बच्चन ने कार्यक्रम के दौरान प्रतापगढ़ और बाबूपट्टी के लोगों से माफी मांगते हुए कहा कि लोग घबराएं नहीं, लाइब्रेरी जल्द शुरू की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अब इस दिशा में काम किया जाएगा।उनके इस बयान के बाद एक बार फिर बाबूपट्टी की उस लाइब्रेरी की चर्चा शुरू हो गई है, जिसका नाम हरिवंश राय बच्चन के नाम पर रखा गया है। स्थानीय लोगों की उम्मीद है कि अमिताभ बच्चन के आश्वासन के बाद लाइब्रेरी को किताबों और जरूरी संसाधनों से लैस कर इसे आम लोगों के लिए शुरू किया जाएगा।
2006 में हुआ था लोकार्पण
बाबूपट्टी में बनी लाइब्रेरी बिल्डिंग का लोकार्पण 2006 में जया बच्चन ने किया था। उस समय इसे गांव के लोगों के लिए शिक्षा और साहित्य से जुड़ी महत्वपूर्ण सुविधा के तौर पर देखा गया था। लेकिन उद्घाटन के वर्षों बाद भी लाइब्रेरी में किताबों और संचालन की कमी बनी रही।अब KBC के मंच से अमिताभ बच्चन द्वारा सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और लाइब्रेरी शुरू करने का आश्वासन दिए जाने के बाद स्थानीय लोगों की नजरें आगे होने वाली कार्रवाई पर हैं। यदि लाइब्रेरी शुरू होती है तो यह बाबूपट्टी और आसपास के लोगों के लिए शिक्षा और साहित्य से जुड़ा महत्वपूर्ण केंद्र बन सकती है।