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12 क्षेत्रीय दलों की एंट्री से बढ़ेगी सियासी चुनौती, वीडियो में जाने नए समीकरणों पर सभी दलों की नजर

 

 

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक दलों ने अभी से रणनीति बनानी शुरू कर दी है। इस बार मुकाबला पहले से अधिक दिलचस्प होने के संकेत हैं, क्योंकि उत्तर प्रदेश के अलावा पांच राज्यों की करीब 12 क्षेत्रीय पार्टियां भी चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही हैं। ऐसे में मुख्य दलों के साथ-साथ क्षेत्रीय दलों के बीच भी वोटों की नई जंग देखने को मिल सकती है।

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बिहार की जनता दल (यूनाइटेड), लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) और विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के अलावा महाराष्ट्र की शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) भी उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश कर रही हैं। माना जा रहा है कि ये दल सीमित सीटों पर चुनाव लड़कर अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति बना रहे हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी कई क्षेत्रीय नेता अपनी-अपनी पार्टियों के जरिए नए समीकरण बनाने में जुटे हैं। चंद्रशेखर आजाद, पल्लवी पटेल और स्वामी प्रसाद मौर्य जैसे नेता आगामी चुनाव में अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं।

असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) भी इस बार उत्तर प्रदेश की करीब 200 मुस्लिम बहुल सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। ओवैसी हाल के दिनों में बहराइच, बिजनौर और सहारनपुर में सभाएं कर चुके हैं। इन क्षेत्रों में मुस्लिम और दलित मतदाताओं की अच्छी संख्या है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि AIMIM इन सीटों पर प्रभावी प्रदर्शन करती है, तो विपक्षी दलों के वोट समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।इधर, नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी भी पूरे दमखम के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। पार्टी का दावा है कि वह प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारने की योजना बना रही है। पार्टी की खास नजर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की दलित और मुस्लिम बहुल सीटों पर है। चर्चा है कि चंद्रशेखर आजाद स्वयं हस्तिनापुर (सुरक्षित) विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। वे बसपा के कमजोर जनाधार का लाभ उठाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

वहीं, जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के प्रमुख राजा भैया भी प्रदेश की सभी 403 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी में हैं। प्रतापगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में उनका प्रभाव माना जाता है। हालांकि, चुनावी मुकाबले में उनके उम्मीदवारों का असर किस हद तक होगा, यह चुनाव परिणाम आने के बाद ही स्पष्ट होगा।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार उत्तर प्रदेश का चुनाव बहुकोणीय हो सकता है। कई क्षेत्रीय दलों की मौजूदगी से विभिन्न दलों के पारंपरिक वोट बैंक प्रभावित होने की संभावना है। हालांकि, कौन-सी पार्टी किसे कितना नुकसान या फायदा पहुंचाएगी, इसका आकलन फिलहाल राजनीतिक विश्लेषण और संभावनाओं के आधार पर किया जा रहा है। अंतिम तस्वीर चुनावी मैदान और मतदाताओं के फैसले के बाद ही साफ होगी।