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राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद के बीच नृपेंद्र मिश्र और चंपत राय में बढ़ी तनातनी, वीडियो वायरल पत्र पर बोले- मीडिया की मनगढ़ंत गाथा

 

अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी का मामला सामने आने के बाद मंदिर निर्माण से जुड़े प्रमुख पदाधिकारियों के बीच मतभेद की खबरों ने तूल पकड़ लिया है। पूर्व आईएएस अधिकारी और राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र तथा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के बीच तनातनी बढ़ती नजर आ रही है। शुक्रवार को अयोध्या पहुंचे नृपेंद्र मिश्र से जब मीडिया ने चंपत राय के कथित आरोपों को लेकर सवाल किया तो वह नाराज हो गए।

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मीडिया के सवालों पर नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि उन्होंने ऐसा कोई पत्र नहीं देखा है। उन्होंने कहा कि जब तक वह पत्र को खुद नहीं देख लेते, तब तक यही मानेंगे कि यह मीडिया की ओर से गढ़ी गई कहानी है। उन्होंने सवाल करने वाले पत्रकारों से कहा कि वे सिर्फ विवाद पैदा करना चाहते हैं और इसी वजह से उनसे इस तरह के सवाल पूछे जा रहे हैं।

नृपेंद्र मिश्र ने वायरल पत्र को लेकर कहा कि हो सकता है कि नौ पन्नों का कोई पत्र हो, लेकिन उन्हें नहीं लगता कि उसमें चंपत राय ने इस तरह की आलोचना की होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पत्र को देखे बिना उसके बारे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है।दरअसल, गुरुवार को चंपत राय के नाम से कथित तौर पर लिखा गया नौ पन्नों का एक पत्र वायरल हुआ था। पत्र पर 18 अगस्त की तारीख दर्ज बताई जा रही है। इसमें मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र की भूमिका को लेकर कई दावे किए गए थे। पत्र में कथित तौर पर नृपेंद्र मिश्र पर मनमानी करने और निर्माण समिति के कामकाज में अपनी पसंद के लोगों को शामिल करने का आरोप लगाया गया था।

वायरल पत्र के सामने आने के बाद मंदिर निर्माण से जुड़े लोगों के बीच मतभेद को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। हालांकि, पत्र की वास्तविकता और उसमें किए गए दावों को लेकर अभी आधिकारिक तौर पर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। नृपेंद्र मिश्र ने भी पत्र देखे बिना उसके आरोपों पर प्रतिक्रिया देने से इनकार किया है।यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला पहले से चर्चा में है। मंदिर से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में निर्माण समिति और ट्रस्ट से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों के बीच कथित मतभेद की खबरों ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है।

नृपेंद्र मिश्र ने मीडिया से बातचीत में यह भी संकेत दिया कि वायरल पत्र को लेकर जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए। उनका कहना है कि पहले पत्र की वास्तविकता और उसके पूरे संदर्भ को देखना जरूरी है।फिलहाल चंपत राय के नाम से वायरल नौ पन्नों के पत्र को लेकर दोनों पक्षों की स्थिति सामने आना बाकी है। यदि पत्र वास्तविक पाया जाता है तो उसमें लगाए गए आरोप राम मंदिर निर्माण समिति के कामकाज और वरिष्ठ पदाधिकारियों के बीच समन्वय को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर सकते हैं। वहीं, यदि पत्र की पुष्टि नहीं होती है तो इसके वायरल होने के पीछे की वजह भी जांच का विषय बन सकती है।