तबादले के विरोध में शिक्षकों का प्रदर्शन, बीएसए कार्यालय परिसर में भरी हुंकार
राज्य में हालिया तबादलों को लेकर शिक्षकों में भारी असंतोष देखने को मिला। सोमवार को जिले के बीएसए (ब्लॉक शिक्षा अधिकारी) कार्यालय परिसर में शिक्षकों ने जमकर हुंकार भरी और धरना प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी जाहिर की। शिक्षकों ने प्रशासन से तबादले की प्रक्रिया में पारदर्शिता और न्यायपूर्ण निर्णय की मांग की।
धरना प्रदर्शन में शामिल शिक्षकों का कहना था कि हालिया तबादले अचानक और बिना किसी उचित कारण के किए गए हैं। कई शिक्षक लंबे समय से जिस स्थान पर कार्यरत थे, उन्हें उनकी इच्छा और परिवारिक परिस्थितियों की अनदेखी करते हुए अलग-अलग स्थानों पर भेज दिया गया। इससे न केवल उनका पेशेवर संतुलन बिगड़ा है, बल्कि निजी और पारिवारिक जीवन पर भी गंभीर असर पड़ा है।
धरने के दौरान शिक्षकों ने भारी संख्या में पोस्टर और बैनर लेकर विरोध जताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग द्वारा तबादले के नियमों में अनियमितताएं स्पष्ट दिखाई दे रही हैं। कुछ शिक्षकों का आरोप था कि तबादलों में सिफारिश और पक्षपात के चलते अन्याय हुआ है। इसके अलावा, कई वरिष्ठ शिक्षक जिन्होंने दशकों तक सेवा दी, उन्हें भी अचानक तबादले के दायरे में लाया गया, जिससे कर्मचारी मनोबल गिरा है।
बीएसए कार्यालय परिसर में घंटों तक जारी धरने में शिक्षकों ने प्रदर्शन करते हुए आवाज़ उठाई कि प्रशासन को तत्काल कदम उठाकर समस्या का समाधान करना चाहिए। उन्होंने मांग की कि तबादले वापस लिए जाएं या फिर न्यायसंगत तरीके से नए तबादले किए जाएं। धरने के दौरान शिक्षकों ने कहा कि यदि उनकी मांग नहीं मानी गई तो आगे चलकर बड़ा आंदोलन किया जा सकता है।
बीएसए कार्यालय के अधिकारियों ने मौके पर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन को मॉनिटर किया और आश्वासन दिया कि शिक्षकों की समस्याओं को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा। अधिकारियों का कहना था कि उन्हें शिक्षकों की नाराजगी समझ में आई है और मामले को गंभीरता से देखा जा रहा है। हालांकि, फिलहाल तबादलों को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
धरने में शामिल शिक्षकों का मानना था कि शिक्षा विभाग को तबादलों के समय शिक्षकों की व्यक्तिगत परिस्थितियों, परिवार और बच्चों की पढ़ाई का ख्याल रखना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि केवल नियमों का पालन करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनमें मानवीय दृष्टिकोण का होना जरूरी है।
धरना प्रदर्शन में विभिन्न स्कूलों के शिक्षक और प्रधानाध्यापक शामिल हुए। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज और बच्चों के भविष्य को संवारे रखते हैं, इसलिए उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेना प्रशासन की जिम्मेदारी है। प्रदर्शन के दौरान प्रशासन और शिक्षकों के बीच संवाद भी हुआ, लेकिन समाधान के लिए अभी उच्च अधिकारियों की मंजूरी की आवश्यकता है।
इस धरने ने यह संदेश दिया है कि शिक्षक वर्ग अपने अधिकारों और निष्पक्ष व्यवहार के लिए किसी भी हद तक आवाज उठाने से पीछे नहीं हटेगा। राज्य सरकार और शिक्षा विभाग के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि शिक्षकों की नाराजगी अगर अनदेखी की गई तो शिक्षा व्यवस्था पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।