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UP में ‘टंकी’ संकट… स्मार्ट मीटर के बाद अब ये बनीं सिरदर्द, एक के बाद एक ढह रहीं; बरेली में 7 लोग दब गए
 

 

उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर पहले से चल रहे विवाद के बीच अब जल जीवन मिशन के तहत बन रही पानी की टंकियों के गिरने की घटनाओं ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हाल ही में बरेली और सिद्धार्थनगर में पानी की ऊंची टंकियों के ढहने के मामलों ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, निगरानी व्यवस्था और सरकारी एजेंसियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष ने इन घटनाओं को भ्रष्टाचार और लापरवाही का परिणाम बताते हुए सरकार को घेरना शुरू कर दिया है, जबकि आम लोगों में भी डर और नाराजगी का माहौल है।

बरेली में निर्माणाधीन पानी की टंकी अचानक भरभराकर गिर गई। घटना के समय आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। गनीमत यह रही कि बड़ा हादसा टल गया और कोई जनहानि नहीं हुई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। उनका कहना है कि कई बार अधिकारियों को शिकायत दी गई, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। घटना के बाद प्रशासन ने जांच के आदेश जरूर दिए हैं, लेकिन लोगों का सवाल है कि अगर समय रहते निगरानी होती तो ऐसी नौबत ही क्यों आती।

इसी तरह सिद्धार्थनगर में भी जल जीवन मिशन के तहत बनाई जा रही पानी की टंकी ढह गई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद सरकार की किरकिरी शुरू हो गई। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि टंकी का ढांचा अचानक कमजोर होकर जमीन पर गिर पड़ा। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य काफी धीमी गति से चल रहा था और गुणवत्ता को लेकर पहले से ही संदेह था।

जल जीवन मिशन केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल है, जिसका उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है। उत्तर प्रदेश में इस योजना पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। ऐसे में लगातार सामने आ रही निर्माण संबंधी गड़बड़ियां सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पैमाने पर चल रहे निर्माण कार्यों में तकनीकी निगरानी और गुणवत्ता परीक्षण को मजबूत करने की जरूरत है। यदि समय-समय पर स्वतंत्र जांच कराई जाए तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।

विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाना शुरू कर दिया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार के कारण जनता की सुरक्षा से समझौता किया जा रहा है। उनका कहना है कि सिर्फ योजनाओं का प्रचार करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीन पर गुणवत्ता सुनिश्चित करनी होगी।

सरकार की ओर से फिलहाल संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही जा रही है। हालांकि जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई देखना चाहती है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं यह संकेत दे रही हैं कि विकास योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना अब सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।