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कानपुर में सिस्टम की चूक: जिंदा शख़्स को मृत घोषित कर दिया गया

 

उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर से एक चौकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें स्वास्थ्य विभाग की भारी लापरवाही के कारण एक जिंदा इंसान सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया। इससे न सिर्फ उनकी पहचान पर संकट आ गया, बल्कि उनके बैंक खाते, सरकारी दस्तावेज़ और आधार कार्ड समेत कई सुविधाओं पर भी बड़ा असर पड़ा।

गोविंदनगर क्षेत्र के गौरव साहू नामक युवक की पहचान समाज सेवा से जुड़ी हुई थी। वह अपने आसपास रहने वाले लोगों की अस्पताल भर्ती व सहायता का काम करते हैं। सितंबर 2025 के महीने में उन्होंने एक लावारिस मरीज को मुरारी लाल चेस्ट अस्पताल में भर्ती कराया था, जहाँ इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई थी। अस्पताल में मरीज की पहचान के लिए गौरव का आधार कार्ड विवरण भी शामिल था।

लेकिन चिकित्सक व अस्पताल कर्मचारियों द्वारा हुई गंभीर चूक के चलते मृतक के रिकॉर्ड में गौरव का नाम दर्ज कर दिया गया, और उसी के आधार पर उनके नाम पर डेथ सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया। इस गलती के कारण सरकारी रिकॉर्ड में वह “मृत” दिखने लगे।

📉 पहचान और सेवाओं पर गहरा असर

जनवरी 2026 में जब गौरव राशन लेने राशन की दुकान पर गए, तो उन्हें बताया गया कि वे सरकारी रिकॉर्ड में ‘मृतक’ हैं, इसलिए राशन नहीं दिया जा सकता है। इस पर उनको समझ नहीं आई और जब उन्होंने अपने बैंक खाते में पैसे निकालने का प्रयास किया, तो उनका बैंक खाता ब्लॉक कर दिया गया। साथ ही उनका आधार कार्ड भी ‘Invalid’ यानी अमान्य दिखने लगा। इतना ही नहीं — पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य दस्तावेज़ भी समस्या में फंसे दिखाई दिए।

बैंक और सरकारी सेवाओं के साथ-साथ उनके दैनिक जीवन पर भी गहरा असर पड़ा। वे अपने परिवार की आर्थिक जरूरतें पूरी नहीं कर पा रहे हैं और हर विभाग के चक्कर काटते हुए परेशान हैं। अधिकारियों से जब उन्होंने गलती सुधारने की बात कही, तो कई विभागों ने इसे “हमारी सीमा से बाहर” बताया — जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गईं।

🧾 आधार प्रणाली और मृत्यु रिकॉर्ड

दरअसल, आधार संख्या को UIDAI (यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया) द्वारा मृतक के लिए Inactive यानी निष्क्रिय चिह्नित कर दिया जाता है जब उसके पास Death Certificate अपडेट होता है। अल्पकाल में आधार डेटाबेस से यह जानकारी बीमा, बैंकिंग और सरकारी लाभों तक पहुंच को प्रभावित कर सकती है यदि डाटा सही तरीके से अपडेट न हो।

UIDAI भी अपने डेटाबेस को साफ-सुथरा रखने के लिए दो करोड़ से अधिक Aadhaar नंबर deactivated कर चुकी है, जिससे केवल वास्तविक मृतकों के आधार ही अवैध तरीके से इस्तेमाल न हो सकें। यह प्रक्रिया पहचान सुरक्षा और धोखाधड़ी रोकने के लिए की जाती है।

लेकिन कानपुर मामले में यह सिस्टम दोष गलत जानकारी पर आधारित था, जिससे एक जिंदा वाक़ई व्यक्ति पूरी तरह से सरकारी रिकॉर्ड और जीवन की बुनियादी सेवाओं से कट गया।

🧑‍⚖️ प्रशासन की प्रतिक्रिया और समाधान की उम्मीद

इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सीएमओ कानपुर (मुख्य चिकित्सा अधिकारी) ने जांच शुरू करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी सिस्टम त्रुटियाँ न दोहराई जाएँ और सही प्रक्रिया के तहत ही मृत्यु रिकॉर्ड अपडेट हो।

📝 सम्पूर्ण तस्वीर

यह मामला दर्शाता है कि सरकारी सिस्टम में छोटी सी चूक भी किसी व्यक्ति की पहचान, बैंकिंग सेवाओं, राशन और दैनिक जीवन को कितनी जल्दी प्रभावित कर सकती है। इस प्रकार के मामलों से बचने के लिए न केवल स्वास्थ्य विभाग बल्कि UIDAI और सभी संबंधित एजेंसियों को अपनी रिकॉर्डिंग तथा सत्यापन प्रणालियों को और मजबूत बनाना होगा ताकि एक जिंदा इंसान को ‘मृत’ मान लेने जैसी गंभीर भूल दोबारा न हो सके।