स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने नार्को टेस्ट के लिए दी हामी, पॉक्सो मामले में जांच में सहयोग का आश्वासन
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने शुक्रवार को कहा कि उनके खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत दर्ज मामले में यदि सच्चाई का पता लगाने के लिए नार्को टेस्ट की आवश्यकता है, तो वह इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि वह न्यायपालिका और जांच एजेंसियों के सामने पूरी पारदर्शिता के साथ सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य हमेशा ही सत्य और न्याय के पक्ष में रहना रहा है, और वह किसी भी प्रकार की छवि या अफवाह से प्रभावित नहीं होंगे।
पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज मामले में स्वामी पर आरोप लगाए गए थे, जिनकी जांच के लिए पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां सक्रिय हैं। स्वामी का यह बयान जांच प्रक्रिया में सहयोग और सच्चाई सामने लाने की इच्छा के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि सत्य का पता लगाने के लिए आवश्यक सभी जांच और परीक्षण में वह पूरी तरह से तैयार हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि नार्को टेस्ट का इस्तेमाल अक्सर आरोपी और पीड़ित की मानसिक स्थिति और सच का पता लगाने के लिए किया जाता है। इस टेस्ट के माध्यम से जांच एजेंसियां यह सुनिश्चित कर सकती हैं कि आरोप वास्तविक और प्रमाणिक हैं या नहीं।
स्वामी के इस बयान के बाद यह संभावना जताई जा रही है कि जांच प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी और प्रभावी तरीके से आगे बढ़ेगी। उन्होंने यह भी कहा कि जांच के दौरान सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा और किसी भी पक्ष को अनावश्यक दबाव या असुविधा नहीं दी जाएगी।
इस मामले में अदालत ने भी कहा है कि जांच एजेंसियों को सत्य का पता लगाने के लिए हर संभव अधिकार दिया जाएगा, और आरोपी को सुनवाई और न्याय का पूरा अधिकार सुरक्षित रहेगा। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का यह कदम जांच प्रक्रिया में सहयोग की सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह का सहयोग कानूनी प्रक्रिया की गंभीरता और पारदर्शिता को बढ़ाता है और यह दर्शाता है कि आरोपी सच्चाई के सामने डर या हिचक नहीं रखता।
कुल मिलाकर, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का नार्को टेस्ट के लिए तैयार होने का बयान इस मामले की जांच और न्याय प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इस कदम से सत्य सामने आने और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की संभावना बढ़ गई है।