ढांचा खड़ा, शिक्षक गायब: डिग्री कॉलेज खुले, एडमिशन भी हुए लेकिन पढ़ाने वाले नहीं; छात्रों की पढ़ाई पर संकट
प्रदेश में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए खोले गए कई डिग्री कॉलेजों में सुविधाओं का ढांचा तो तैयार हो गया, लेकिन शिक्षकों की कमी ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई कॉलेजों में भवन तैयार हैं, प्रवेश प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है, लेकिन विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं।
शिक्षकों की कमी के कारण छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कई कॉलेजों में विषयवार शिक्षक नहीं होने से विद्यार्थियों को नियमित कक्षाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
कॉलेज खुले, लेकिन शिक्षकों की नियुक्ति नहीं
सरकार की ओर से नए डिग्री कॉलेज खोलने का उद्देश्य ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराना था। इसके तहत कई स्थानों पर कॉलेज शुरू किए गए और छात्रों ने प्रवेश भी लिया।
लेकिन कॉलेज शुरू होने के बाद सबसे बड़ी समस्या शिक्षकों की कमी के रूप में सामने आई है। कई संस्थानों में स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने से पढ़ाई का जिम्मा सीमित संसाधनों पर टिका हुआ है।
छात्रों को हो रही परेशानी
विद्यार्थियों का कहना है कि कॉलेज में प्रवेश लेने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि नियमित कक्षाएं चलेंगी और विषयों की बेहतर पढ़ाई होगी। लेकिन शिक्षकों की कमी के कारण उन्हें कई विषयों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कुछ कॉलेजों में अतिथि शिक्षकों या दूसरे विकल्पों के माध्यम से पढ़ाई चलाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन यह व्यवस्था पर्याप्त साबित नहीं हो रही।
उच्च शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
शिक्षाविदों का कहना है कि केवल भवन और संसाधन तैयार कर देना पर्याप्त नहीं है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए योग्य और पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति जरूरी है।
उनका कहना है कि यदि समय पर शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई तो नए कॉलेजों का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा और छात्रों का भविष्य प्रभावित होगा।
सरकार के सामने बड़ी चुनौती
नए डिग्री कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति अब सरकार के सामने बड़ी चुनौती बन गई है। उच्च शिक्षा विभाग को कॉलेजों में विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मिल सके।
फिलहाल कॉलेजों में दाखिला ले चुके छात्र नियमित पढ़ाई और स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। प्रशासनिक स्तर पर इस समस्या के समाधान की जरूरत महसूस की जा रही है।