संसद परिसर में सपा का अनोखा प्रदर्शन: राम मंदिर चढ़ावा के नाम पर जुटाए 47,100 रुपए, वीडियो में बोले- 'एक-एक पैसे का रहेगा हिसाब'
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) ने संसद परिसर में अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। सदन की कार्यवाही के बाद सपा सांसद संसद के मकर द्वार पर पहुंचे और वहां INDI गठबंधन के सांसदों से प्रतीकात्मक रूप से चंदा जुटाया। प्रदर्शन के दौरान जुटाई गई राशि को अयोध्या स्थित राम मंदिर में भेजने का ऐलान भी किया गया। प्रदर्शन के दौरान सपा सांसदों ने पूरे अभियान को पारदर्शी बनाने के लिए मौके पर ही चंदे की गिनती की। सांसद राम शिरोमणि वर्मा नोटों की गिनती करते नजर आए, जबकि सांसद धर्मेंद्र यादव उनकी मदद कर रहे थे। सांसद अक्षय प्रताप दान देने वाले सांसदों के नाम रजिस्टर में दर्ज कर रहे थे। वहीं, सांसद डिंपल यादव भी पूरी प्रक्रिया पर नजर बनाए रहीं। अयोध्या से सांसद अवधेश प्रसाद पूरे कार्यक्रम की निगरानी करते दिखाई दिए।
दानपेटी में जुटे 47,100 रुपए
सपा के इस प्रतीकात्मक अभियान के दौरान कुल 47,100 रुपए का चंदा जुटाया गया। चंदे की गिनती पूरी होने के बाद यह राशि अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद को सौंपी गई।धर्मेंद्र यादव ने कहा कि पूरे चंदे का हिसाब-किताब सार्वजनिक रखा जाएगा ताकि किसी तरह की गड़बड़ी की कोई गुंजाइश न रहे। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान जुटाई गई पूरी राशि सीधे अयोध्या के राम मंदिर में भेजी जाएगी।
'एक-एक पैसे का रहेगा हिसाब'
अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद ने मीडिया के सामने नोटों की गड्डी दिखाते हुए कहा कि यह प्रभु श्रीराम के मंदिर का चढ़ावा है और इसकी पूरी जिम्मेदारी के साथ मंदिर तक पहुंचाया जाएगा।उन्होंने कहा, "यह पैसा चोरी नहीं होने पाएगा। यह प्रभु श्रीराम के मंदिर का चढ़ावा है। हमारे सभी सदस्यों ने इसमें योगदान दिया है। मैं जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं कि इसमें एक-एक पैसे का हिसाब रहेगा और कोई भी इसे इधर-उधर नहीं कर पाएगा।"
चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश
सपा ने इस प्रदर्शन के जरिए राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे को राजनीतिक और सार्वजनिक बहस का विषय बनाने की कोशिश की। पार्टी का कहना है कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मामलों में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए और यदि किसी प्रकार की अनियमितता के आरोप लगते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।संसद परिसर में हुए इस अनोखे प्रदर्शन ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। सपा का कहना है कि यह केवल विरोध नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था और चढ़ावे की पारदर्शिता का प्रतीकात्मक संदेश है।