नोएडा में सोशल मीडिया की लत से बढ़ा पारिवारिक तनाव, हर महीने 8 से 10 किशोरियां घर छोड़ने के मामलों में पहुंच रहीं वन स्टॉप सेंटर
नोएडा में मोबाइल स्क्रीन पर कुछ सेकंड की रील, उस पर मिलने वाले लाइक-कमेंट और सोशल मीडिया की आभासी दुनिया का आकर्षण अब कई परिवारों के लिए चिंता का कारण बनता जा रहा है। किशोरियों में सोशल मीडिया और मोबाइल फोन का बढ़ता इस्तेमाल कई बार परिवार के साथ टकराव की स्थिति पैदा कर रहा है। छोटी-छोटी बातों पर होने वाला विवाद धीरे-धीरे इतना बढ़ जाता है कि कुछ किशोरियां घर छोड़ने तक का कदम उठा लेती हैं। ऐसे मामलों में भावनात्मक तनाव और पारिवारिक संवाद की कमी भी बड़ी वजह बनकर सामने आ रही है।
खबर के मुताबिक, नोएडा स्थित वन स्टॉप सेंटर में पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर के अलग-अलग इलाकों से हर महीने करीब 8 से 10 किशोरियां ऐसे मामलों में पहुंच रही हैं, जिनमें परिवार से विवाद के बाद घर छोड़ना या भावनात्मक परेशानी शामिल है। इसके अलावा काउंसलर के पास रोजाना करीब 10 से 12 किशोरियों से जुड़े मामले आने की बात सामने आई है। इन मामलों में सोशल मीडिया और मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल को लेकर परिवार और किशोरियों के बीच होने वाले विवाद भी शामिल बताए जा रहे हैं।
किशोरियों के लिए सोशल मीडिया केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रह गया है। रील देखना, वीडियो बनाना, दोस्तों से ऑनलाइन बातचीत करना और पोस्ट पर लाइक-कमेंट पाना उनके रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बन चुका है। ऐसे में जब परिवार की ओर से मोबाइल इस्तेमाल पर रोक या समय की पाबंदी लगाई जाती है तो कई बार किशोरियां इसे अपनी आजादी में हस्तक्षेप के तौर पर लेती हैं। इससे घर में बहस और तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है।
काउंसलरों के सामने आने वाले मामलों में भावनात्मक उतार-चढ़ाव भी एक महत्वपूर्ण पहलू बताया जा रहा है। किशोरावस्था में दोस्ती, रिश्ते, सोशल मीडिया पर पहचान और ऑनलाइन प्रतिक्रिया को लेकर भावनाएं तेजी से प्रभावित हो सकती हैं। किसी पोस्ट पर कम लाइक मिलने से लेकर ऑनलाइन दोस्त के जवाब नहीं देने तक, छोटी घटनाएं भी कुछ किशोरियों के लिए तनाव का कारण बन सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में केवल मोबाइल छीन लेना या सोशल मीडिया पर पूरी तरह रोक लगाना समाधान नहीं है। माता-पिता को किशोरियों से संवाद बनाए रखने और उनकी ऑनलाइन गतिविधियों को समझने की जरूरत है। बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाली दुनिया हमेशा वास्तविक नहीं होती।
वन स्टॉप सेंटर में पहुंचने वाले मामलों से यह भी संकेत मिलता है कि परिवार और किशोरियों के बीच संवाद की कमी समस्या को गंभीर बना सकती है। जरूरत है कि अभिभावक बच्चों की बात धैर्य से सुनें और विवाद की स्थिति में तुरंत कठोर कदम उठाने के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाएं। वहीं किशोरियों को भी सोशल मीडिया के इस्तेमाल और ऑनलाइन रिश्तों को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। मोबाइल और सोशल मीडिया का संतुलित इस्तेमाल ही इस बढ़ती चुनौती से निपटने में मददगार हो सकता है।