अतीक-अशरफ से जुड़ी जमीनों की बिक्री मामले में SIT जांच तेज, किसानों और संबंधित लोगों से जुटाई जा रही जानकारी
माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ से जुड़ी जमीनों की बिक्री और कुर्क संपत्तियों की प्लॉटिंग के मामले में विशेष जांच दल (SIT) ने जांच तेज कर दी है। मामले में कई स्तरों पर अनियमितताओं की शिकायत सामने आने के बाद एसआईटी लगातार किसानों और अतीक से जुड़े लोगों से जानकारी जुटा रही है।
जानकारी के अनुसार, अतीक अहमद से जुड़ी जमीनों की खरीद-फरोख्त का मामला शासन स्तर तक पहुंचा था। इस मामले को लेकर विधायक पूजा पाल ने भी शिकायत की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि माफिया से जुड़ी कुछ जमीनों को नियमों के विपरीत बेचा गया और कुर्क संपत्तियों की प्लॉटिंग कर दी गई।
शासन के निर्देश के बाद मामले की जांच एसआईटी को सौंपी गई। जांच टीम अब उन जमीनों के दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है, जो अतीक और अशरफ से जुड़ी बताई जा रही हैं। इसके अलावा यह भी पता लगाया जा रहा है कि किन लोगों के नाम पर जमीनों का हस्तांतरण हुआ और इसमें किन व्यक्तियों की भूमिका रही।
एसआईटी की टीम किसानों से भी पूछताछ कर रही है। टीम यह जानने का प्रयास कर रही है कि जमीनों की खरीद-बिक्री की प्रक्रिया किस तरह हुई और क्या किसी दबाव या गलत तरीके से जमीनों का लेनदेन किया गया था। इसके साथ ही राजस्व विभाग के रिकॉर्ड और जमीनों से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान उन संपत्तियों पर भी नजर रखी जा रही है जिन्हें प्रशासन ने पहले कुर्क किया था। एसआईटी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कुर्क संपत्तियों की प्लॉटिंग या बिक्री कैसे हुई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल रहे।
अतीक अहमद और अशरफ की अवैध संपत्तियों को लेकर प्रशासन पहले भी कई कार्रवाई कर चुका है। पुलिस और प्रशासन की ओर से माफिया नेटवर्क से जुड़ी संपत्तियों को चिह्नित कर कार्रवाई की गई थी। अब जमीनों की बिक्री और प्लॉटिंग के आरोपों की जांच के जरिए पूरी प्रक्रिया की सच्चाई सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है।
एसआईटी अधिकारियों का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल टीम दस्तावेजों की जांच और संबंधित लोगों से पूछताछ में जुटी हुई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन की नजर एसआईटी जांच की रिपोर्ट पर टिकी हुई है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि जमीनों के मामले में किन लोगों की भूमिका सामने आती है और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।