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चांदी की चमक बनी सराफा कारोबार की चिंता, 70% तक गिरी बिक्री, पायल कारखानों पर लटका ताला

 

चांदी की कीमतों में आई तेज़ी ने सराफा कारोबारियों की नींद उड़ा दी है। हालात ऐसे बन गए हैं कि एक ओर जहां बाज़ार से ग्राहक लगभग गायब हो गए हैं, वहीं दूसरी ओर चांदी से जुड़े परंपरागत उद्योग, खासकर पायल निर्माण से जुड़े कारखाने ठप पड़ने लगे हैं। सराफा व्यापारियों के मुताबिक, चांदी के दाम बढ़ने से 70 प्रतिशत तक बिक्री घट चुकी है, जिससे कारोबार पर गहरा असर पड़ा है।

ग्राहक हुए दूर, बाजार सूने

सराफा बाजारों में आमतौर पर शादी-विवाह और त्योहारों के सीजन में चहल-पहल रहती है, लेकिन मौजूदा हालात इसके बिल्कुल उलट हैं। चांदी के भाव अचानक बढ़ने से आम ग्राहक खरीदारी से पीछे हट रहा है। व्यापारी बताते हैं कि पायल, कड़े, बिछिया और हल्के गहनों की मांग में सबसे ज्यादा गिरावट आई है।

एक सराफा व्यापारी के अनुसार, “ग्राहक दाम सुनते ही पीछे हट जा रहा है। जो पायल पहले 2-3 हजार रुपये में मिल जाती थी, अब उसके दाम काफी बढ़ गए हैं। ऐसे में मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोग खरीदारी टाल रहे हैं।”

पायल कारखानों पर संकट

चांदी की तेजी का सबसे ज्यादा असर पायल बनाने वाले कारखानों पर पड़ा है। कई कारखानों में काम पूरी तरह ठप हो चुका है और वहां ताले लटक रहे हैं। कारीगरों के पास काम नहीं है, जिससे उनकी रोज़ी-रोटी पर संकट गहरा गया है।

कारखाना संचालकों का कहना है कि कच्चे माल यानी चांदी की कीमतें इतनी अधिक हो गई हैं कि उत्पादन करना जोखिम भरा हो गया है। तैयार माल की बिक्री नहीं होने से पूंजी फंसने का डर बना हुआ है।

कारीगरों को काम देने से कतरा रहे सराफ

पहले सराफा व्यापारी घर पर पायल और अन्य गहने तैयार कराने के लिए कारीगरों को कच्चा माल दे देते थे। लेकिन अब चांदी के बढ़ते दामों के चलते व्यापारी कारीगरों को कच्चा माल देने से कतरा रहे हैं। चोरी, नुकसान या बाजार में और गिरावट का डर उन्हें पीछे खींच रहा है।

इसका सीधा असर कारीगरों पर पड़ रहा है। कई कारीगर मजबूरी में दूसरे काम तलाशने लगे हैं या फिर बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं।

कारोबारियों में चिंता, भविष्य को लेकर अनिश्चितता

सराफा व्यापारियों का कहना है कि अगर चांदी की कीमतों में जल्द स्थिरता नहीं आई, तो स्थिति और बिगड़ सकती है। छोटे व्यापारी और पारंपरिक कारीगर सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।

सरकार और बाजार से उम्मीद

कारोबारियों को उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में नरमी आए या घरेलू स्तर पर मांग बढ़े, जिससे बाजार को राहत मिल सके। कुछ व्यापारी आगामी विवाह सीजन से हल्की सुधार की उम्मीद भी जता रहे हैं।

कुल मिलाकर, चांदी की चमक इस समय सराफा कारोबार के लिए भारी पड़ रही है। जब तक कीमतों में संतुलन नहीं आता, तब तक बाजार में सुस्ती और कारीगरों की मुश्किलें बनी रहने की आशंका जताई जा रही है।