खामेनेई की मौत पर यूपी में शिया समुदाय का प्रदर्शन, एक्सक्लूसिव फुटेज में देंखे 3 दिन का शोक घोषित
उत्तर प्रदेश में शिया समुदाय सुप्रीम लीडर आयातुल्लाह खामेनेई की मौत के विरोध में सड़कों पर उतर आया। लखनऊ में रविवार रात हजारों की संख्या में लोगों ने प्रदर्शन किया। छोटा इमामबाड़ा से बड़ा इमामबाड़ा तक कैंडल मार्च निकाला गया, जिसमें लोग हाथों में खामेनेई के पोस्टर लेकर “अमेरिका-इजराइल मुर्दाबाद” के नारे लगा रहे थे।
लखनऊ के अलावा बिजनौर और अमरोहा में भी शिया समुदाय ने जुलूस निकाला। प्रदर्शनकारी मोहर्रम की तरह युवाओं और बच्चों ने खुद को जंजीरों से पीटा और मातम मनाया। प्रयागराज में महिलाओं ने भी कैंडल मार्च निकाला। यह प्रदर्शन खामेनेई की मौत की खबर मिलने के बाद शुरू हुआ और रात भर जारी रहा।
ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस अवसर पर 3 दिन का शोक घोषित किया। बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि लोग अपने घरों पर काले झंडे लगाएंगे और काले कपड़े पहनेंगे। इसके साथ ही छोटा और बड़ा इमामबाड़ा 3 मार्च तक बंद रहेंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के प्रदर्शन शिया समुदाय की भावनाओं और उनके धार्मिक दृष्टिकोण को दर्शाते हैं। खामेनेई की मौत के बाद पूरे भारत में शिया समुदाय में मातम और आक्रोश का माहौल है। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि उनके रहबर की शहादत खाली नहीं जाएगी और वे अपने नेता के आदर्शों और विचारों के लिए हमेशा खड़े रहेंगे।
लखनऊ में कैंडल मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण ढंग से चलते रहे, लेकिन उनके नारे और पुतलों को जलाना प्रशासन के लिए चुनौती बन सकता है। सुरक्षा बलों ने बड़ी संख्या में तैनाती की और प्रदर्शन की निगरानी की।
बिजनौर और अमरोहा में भी जुलूसों का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय लोगों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारी अपने नेताओं और धार्मिक प्रतीकों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त कर रहे थे।
प्रयागराज में महिलाओं द्वारा निकाले गए कैंडल मार्च ने इस प्रदर्शन को और व्यापक बनाया। इस दौरान उन्होंने अपने परिवार और समाज के अन्य सदस्यों को भी शामिल किया। विशेषज्ञों के अनुसार, यह आंदोलन केवल धार्मिक भावनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी इसका गहरा प्रभाव है।
शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने लोगों से संयम बरतने और किसी प्रकार की हिंसा से बचने की अपील की है। उनका कहना है कि मातम और प्रदर्शन शांति और धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार होना चाहिए।
इस प्रकार, खामेनेई की मौत के बाद उत्तर प्रदेश में शिया समुदाय ने व्यापक प्रदर्शन और मातम किया। लखनऊ, बिजनौर, अमरोहा और प्रयागराज में आयोजित कैंडल मार्च और जुलूसों ने इस स्थिति को पूरे राज्य में महत्वपूर्ण बना दिया है। 3 दिन के शोक और इमामबाड़ों के बंद होने की घोषणा से शिया समुदाय की भावनाओं और श्रद्धा की गहराई दिखाई दे रही है।