उत्तर भारत में भीषण गर्मी का कहर, यूपी में पारा 48°C तक, मानसून 26 मई तक केरल में दस्तक देगा
उत्तर भारत में भीषण गर्मी का कहर लगातार जारी है। दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और कई अन्य राज्यों में हीटवेव का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले कुछ दिनों तक तापमान सामान्य से काफी अधिक रहेगा, जिससे लोगों को सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
उत्तर प्रदेश में पारा 48°C तक
उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। बांदा और आसपास के इलाकों में बुधवार को पारा 48 डिग्री सेल्सियस के पार दर्ज किया गया। लोगों का कहना है कि दिन के समय बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। स्कूल, बाजार और सार्वजनिक स्थानों में लोग धूप और गर्म हवाओं से बचने के लिए घरों में रह रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर प्रदेश और आसपास के मैदानी इलाकों में गर्मी का यह पैटर्न अल नीनो प्रभाव, कमजोर पश्चिमी विक्षोभ और घटती हरियाली के कारण और भी बढ़ा है। इसके चलते हीटवेव की तीव्रता अधिक महसूस हो रही है।
दिल्ली-एनसीआर में भीषण गर्मी
दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में भी तापमान सामान्य से 4-5 डिग्री अधिक है। मौसम विभाग ने कहा है कि दिन के समय धूप और गर्म हवा से बचने के लिए जल अधिक मात्रा में पीना, हल्के कपड़े पहनना और सीधे धूप में समय बिताने से बचना जरूरी है।
दिल्ली प्रशासन ने भी अलर्ट जारी किया है और कहा है कि लोगों को सार्वजनिक स्थानों पर पानी की पर्याप्त सुविधा दी जाएगी। स्कूलों और ऑफिसों में आवश्यकतानुसार समय में बदलाव करने के निर्देश दिए गए हैं।
मानसून की तैयारियाँ
मौसम विभाग ने भविष्यवाणी की है कि केरल में मानसून 26 मई तक दस्तक दे सकता है। इसके साथ ही दक्षिण-पश्चिम मॉनसून धीरे-धीरे पूरे देश में सक्रिय होगा। मौसम विशेषज्ञों ने कहा कि मानसून आने के बाद उत्तर भारत में तापमान में गिरावट आएगी और गर्मी से थोड़ी राहत मिलेगी।
विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि मानसून आने तक गर्मी और लू से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बना रहेगा। बुजुर्ग, बच्चे और बाहरी कामगार विशेष रूप से प्रभावित हो सकते हैं।
सरकारी तैयारी और नागरिक सतर्कता
राज्य और केंद्र सरकार ने नागरिकों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि हीटस्ट्रोक और निर्जलीकरण के मामलों में तुरंत मेडिकल सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही, सार्वजनिक जगहों पर शीतल पेय और पानी की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।
सामाजिक और पर्यावरण विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस तरह के चरम मौसम की घटनाओं के पीछे जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय असंतुलन मुख्य कारण हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसे हीटवेव से निपटने के लिए सतत और ठोस उपाय करने होंगे।