संतकबीरनगर का मजदूर 23 साल तक मुजफ्फरनगर में बंधक रहा, घर लौटते ही परिवार में छाई खुशी
संतकबीरनगर के लेडुआ गांव निवासी रामनयन उर्फ रामू करीब 23 साल बाद अपने घर लौट आए हैं। परिजनों का आरोप है कि उन्हें मुजफ्फरनगर के चरथावल क्षेत्र की एक डेयरी में कथित तौर पर बंधक बनाकर वर्षों तक मजदूरी कराई गई। इस दौरान उन्हें मेहनत के बदले मजदूरी नहीं दी गई और केवल खाने-पीने की व्यवस्था की जाती थी।
रामनयन के अचानक घर लौटने से परिवार में खुशी का माहौल है। 23 साल से परिवार उनके लौटने का इंतजार कर रहा था। इस दौरान बच्चों ने पिता के बिना जिंदगी बिताई और परिवार को आर्थिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ा।
डेयरी में कराया जाता था काम
परिजनों के मुताबिक, रामनयन करीब 23 साल पहले घर से बाहर काम करने गए थे। इसके बाद वह मुजफ्फरनगर के चरथावल क्षेत्र में एक डेयरी में काम करने लगे। आरोप है कि उन्हें वहां से वापस घर नहीं आने दिया गया और लगातार काम कराया जाता रहा।
परिजनों का यह भी आरोप है कि काम करने से इनकार करने पर रामनयन के साथ कथित तौर पर मारपीट की जाती थी। उन्हें मेहनत के बदले कोई मजदूरी नहीं दी जाती थी। परिवार को लंबे समय तक यह जानकारी भी नहीं थी कि रामनयन कहां और किस स्थिति में रह रहे हैं।
ग्राम प्रधान ने पहचान लिया
रामनयन की घर वापसी में मुजफ्फरनगर के ग्राम प्रधान मोहम्मद रफीक की अहम भूमिका बताई जा रही है। प्रधान की मुलाकात रामनयन से हुई तो उन्होंने उन्हें पहचान लिया। रामनयन उस समय डरे और सहमे हुए थे।
प्रधान ने उनके परिवार से संपर्क कर पूरी जानकारी दी। इसके बाद परिजन मुजफ्फरनगर पहुंचे और पुलिस-प्रशासन की मदद से रामनयन को वापस संतकबीरनगर लेकर आए।
23 साल बाद पिता को देखकर भावुक हुए बच्चे
रामनयन के घर पहुंचते ही परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। जिन बच्चों ने वर्षों तक पिता की राह देखी, उन्हें आखिरकार अपने पिता को देखने और उनके साथ समय बिताने का मौका मिला।
परिवार के लिए यह पल खुशी के साथ भावुक कर देने वाला भी था। 23 साल का लंबा इंतजार खत्म होने के बाद रामनयन अब अपने गांव और परिवार के बीच हैं।
मजदूरी और कथित शोषण की जांच का सवाल
इस मामले ने 23 वर्षों की कथित मजदूरी और शोषण को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। यदि परिजनों के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला बेहद गंभीर हो सकता है। अब यह पता लगाना जरूरी है कि रामनयन से इतने लंबे समय तक किन परिस्थितियों में काम कराया गया और उन्हें मेहनत का भुगतान क्यों नहीं किया गया।
परिजनों और ग्रामीणों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही रामनयन को उनकी मेहनत का उचित मेहनताना दिलाने की भी मांग उठ रही है।