Saharanpur Politics: इमरान मसूद के दामाद शायान ने कांग्रेस छोड़ सपा का थामा दामन, फिर चर्चा में आया काजी परिवार
सहारनपुर की सियासत में इन दिनों एक बार फिर काजी परिवार चर्चा के केंद्र में है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के दामाद शायान मसूद ने कांग्रेस छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है। लखनऊ में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। शायान के इस कदम को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
शायान मसूद का सपा में जाना इसलिए भी खास है क्योंकि वह पश्चिमी यूपी के चर्चित राजनीतिक परिवार से आते हैं। वह पूर्व केंद्रीय मंत्री और सहारनपुर के कद्दावर नेता रहे दिवंगत काजी रशीद मसूद के पौत्र हैं। काजी रशीद मसूद का सहारनपुर की राजनीति में लंबे समय तक प्रभाव रहा और उनका समाजवादी पार्टी से भी मजबूत राजनीतिक जुड़ाव रहा था।
करीब पांच दशक से सियासत में प्रभाव
काजी परिवार का सहारनपुर की राजनीति में करीब पांच दशक से प्रभाव माना जाता है। परिवार के कई सदस्य अलग-अलग समय पर चुनावी राजनीति में सक्रिय रहे हैं। काजी रशीद मसूद पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति के प्रमुख मुस्लिम नेताओं में गिने जाते थे। उनके राजनीतिक प्रभाव का असर सहारनपुर और आसपास के इलाकों में लंबे समय तक दिखाई देता रहा।
इसी राजनीतिक विरासत से जुड़े शायान मसूद ने भी सक्रिय राजनीति में कदम रखा। वह सपा सरकार के दौरान दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री रह चुके हैं। इसके बाद वर्ष 2019 से वह कांग्रेस के साथ जुड़े और 2024 के लोकसभा चुनाव में अपने ससुर इमरान मसूद के चुनाव प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाई थी।
कांग्रेस छोड़ने के बाद सपा में वापसी
20 अगस्त 2026 को शायान मसूद ने कांग्रेस छोड़कर समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। वह अपने पिता शाजान मसूद के साथ लखनऊ स्थित सपा कार्यालय पहुंचे थे। अखिलेश यादव ने उन्हें पार्टी में शामिल कराया। शायान के सपा में शामिल होने के बाद सहारनपुर की स्थानीय राजनीति में इसकी चर्चा तेज हो गई है।
शायान का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल अपनी तैयारियों को तेज कर रहे हैं। ऐसे में काजी परिवार से जुड़े एक युवा नेता का सपा में जाना पार्टी के लिए पश्चिमी यूपी में राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
इमरान मसूद के लिए भी राजनीतिक झटका
शायान मसूद के कांग्रेस छोड़ने को इमरान मसूद के लिए भी झटके के तौर पर देखा जा रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में शायान अपने ससुर के चुनाव प्रचार में सक्रिय रहे थे और जनसंपर्क से लेकर विभिन्न चुनावी कार्यक्रमों में उनके साथ नजर आए थे।
शायान के सपा में जाने के बाद इमरान मसूद और उनके परिवार की राजनीतिक रणनीति को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। वहीं सपा के लिए यह कदम पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपने पुराने राजनीतिक नेटवर्क को मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
परिवार की पुरानी सियासी विरासत फिर चर्चा में
काजी रशीद मसूद के बाद उनके परिवार की राजनीतिक विरासत अलग-अलग रूपों में आगे बढ़ी। उनके बेटे शादान मसूद भी सपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं। अब शायान के सपा में लौटने से काजी परिवार और समाजवादी पार्टी के पुराने राजनीतिक रिश्ते फिर चर्चा में आ गए हैं।
हालांकि शायान के सपा में शामिल होने के बाद परिवार के भीतर मतभेद की खबरें भी सामने आई हैं। उनके रिश्तेदार हमजा मसूद ने सोशल मीडिया पर शायान को लेकर गंभीर आरोप लगाए, जिसका शायान ने भी जवाब दिया है। दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
फिलहाल शायान मसूद के सपा में जाने के बाद सहारनपुर की राजनीति में काजी परिवार एक बार फिर सुर्खियों में है। आने वाले विधानसभा चुनावों में यह राजनीतिक बदलाव पश्चिमी यूपी के समीकरणों पर कितना असर डालता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।