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कानपुर देहात के किसानों को राहत, MSP पर उड़द-मूंग और मूंगफली खरीद के लिए 17 केंद्र मंजूर

 

जिले के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। ग्रीष्म जायद विपणन मौसम वर्ष 2026-27 के तहत मूल्य समर्थन योजना (MSP) पर उड़द, मूंग और मूंगफली की खरीद के लिए जिले में 17 क्रय केंद्रों को मंजूरी दे दी गई है। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बेहतर सुविधा मिलेगी और उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ मिल सकेगा।

जिला प्रशासन ने खरीद प्रक्रिया को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। जिलाधिकारी कपिल सिंह ने सभी संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि खरीद कार्य पूरी तरह पारदर्शी, समयबद्ध और किसान हितैषी तरीके से संचालित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि किसानों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

मूल्य समर्थन योजना के तहत सरकार किसानों की फसलों को निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदती है। इसका उद्देश्य किसानों को बाजार में उचित मूल्य दिलाना और बिचौलियों से होने वाले नुकसान से बचाना है। अब जिले में 17 केंद्रों के संचालन से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए स्थानीय स्तर पर सुविधा उपलब्ध होगी।

प्रशासन की ओर से क्रय केंद्रों पर सभी जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। किसानों के पंजीकरण, उपज की गुणवत्ता जांच और भुगतान प्रक्रिया को भी सुचारु रखने पर जोर दिया गया है।

जिलाधिकारी ने कहा कि खरीद प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी केंद्रों पर किसानों के लिए बेहतर व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए और समय पर खरीद पूरी की जाए। उन्होंने अधिकारियों को लगातार निगरानी रखने के भी निर्देश दिए हैं।

किसानों का कहना है कि MSP पर खरीद केंद्र खुलने से उन्हें अपनी फसल का उचित मूल्य मिलने की उम्मीद बढ़ी है। खासकर छोटे और सीमांत किसानों को इसका अधिक लाभ मिलेगा, क्योंकि उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।

कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, किसानों को योजना का लाभ लेने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत पंजीकरण कराना होगा। इसके बाद वे संबंधित क्रय केंद्रों पर अपनी फसल बेच सकेंगे।

कानपुर देहात में 17 खरीद केंद्रों की मंजूरी को किसानों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। प्रशासन का दावा है कि इस बार खरीद व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए विशेष निगरानी रखी जाएगी, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का सही मूल्य समय पर मिल सके।