2017 में गुजरात से लापता हुईं रतन बेन 9 साल बाद लखनऊ में मिलीं
गुजरात से साल 2017 में लापता हुईं 55 वर्षीय रतन बेन आखिरकार 9 साल बाद अपने परिवार से मिल गईं। रतन बेन लखनऊ में मिलीं, जहां उन्हें परिवार से मिलवाया गया। लंबे इंतजार के बाद जब मां और बेटा आमने-सामने आए तो दोनों भावुक हो गए और एक-दूसरे से लिपटकर रो पड़े। यह भावुक पल देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
बताया जा रहा है कि रतन बेन मानसिक रूप से बीमार थीं और लापता होने के बाद कई वर्षों तक अलग-अलग जगहों पर भटकती रहीं। परिवार ने उन्हें खोजने की काफी कोशिश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिल पाया था। आखिरकार पुलिस और सामाजिक संस्थाओं की मदद से उनकी पहचान हो सकी और उन्हें परिवार तक पहुंचाया गया।
2017 में अचानक गायब हो गई थीं रतन बेन
जानकारी के मुताबिक, रतन बेन गुजरात से वर्ष 2017 में लापता हुई थीं। अचानक गायब होने के बाद परिवार ने उनकी तलाश शुरू की। रिश्तेदारों और परिचितों से पूछताछ के साथ-साथ कई जगहों पर उन्हें खोजा गया, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली।
परिवार के लिए यह नौ साल का समय बेहद मुश्किल भरा रहा। बेटे और अन्य परिजन लगातार उनके लौटने की उम्मीद लगाए बैठे थे। समय बीतता गया, लेकिन रतन बेन का कोई पता नहीं चल पाया।
लखनऊ में मिलीं रतन बेन
लंबे समय बाद रतन बेन लखनऊ में मिलीं। उनकी हालत और पहचान की जानकारी मिलने के बाद पुलिस और संबंधित लोगों ने उनके परिवार से संपर्क किया। पहचान की पुष्टि होने के बाद उन्हें गुजरात से आए परिजनों को सौंप दिया गया।
रतन बेन को देखकर परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। बेटे ने जैसे ही अपनी मां को देखा, वह भावुक हो गया। दोनों ने एक-दूसरे को गले लगाया और लंबे समय से दबे हुए भावनाओं के आंसू निकल पड़े।
मानसिक बीमारी के कारण नहीं बता पा रही थीं पहचान
बताया जा रहा है कि रतन बेन मानसिक रूप से परेशान थीं, जिसके कारण वह अपने बारे में सही जानकारी नहीं दे पा रही थीं। ऐसी स्थिति में उनकी पहचान करना और परिवार तक पहुंचाना चुनौतीपूर्ण था।
पुलिस और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद से उनकी जानकारी जुटाई गई। जांच और संपर्क प्रक्रिया के बाद आखिरकार उनका परिवार मिल गया।
परिवार के लिए यादगार पल
नौ साल बाद मां-बेटे का मिलना परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। जिस मां को परिवार ने वर्षों तक तलाशा, वह अचानक वापस मिल गईं। इस भावुक मिलन ने वहां मौजूद लोगों को भी भावुक कर दिया।
इस घटना ने एक बार फिर यह दिखाया कि लापता लोगों की तलाश में पुलिस, प्रशासन और सामाजिक संगठनों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती है। कई बार मानसिक परेशानी या अन्य कारणों से बिछड़े लोग वर्षों बाद अपने परिवार तक पहुंच पाते हैं।