अयोध्या राम मंदिर में भव्य रामनवमी उत्सव, वीडियो में देंखे रामलला का होगा सूर्य तिलक
पवित्र नगरी अयोध्या में स्थित भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में इस वर्ष 27 मार्च (शुक्रवार) को रामनवमी का पर्व बड़े ही धूमधाम और धार्मिक उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर रामलला के विशेष दर्शन और अनोखे ‘सूर्य तिलक’ आयोजन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है।
रामनवमी के शुभ अवसर पर दोपहर ठीक 12 बजे रामलला का सूर्य तिलक किया जाएगा। इस दौरान लगभग 4 मिनट तक सूर्य की किरणें विशेष रूप से रामलला के ललाट पर पड़ेंगी। यह खगोलीय और आध्यात्मिक आयोजन भक्तों के लिए अत्यंत विशेष माना जा रहा है, जो श्रद्धा और विज्ञान के अद्भुत संगम का प्रतीक होगा।
इस पावन अवसर पर भगवान राम को पीले रंग के दिव्य वस्त्र धारण कराए जाएंगे। मंदिर परिसर में इस महत्वपूर्ण अनुष्ठान के दौरान कुल 14 विशेष पुजारी गर्भगृह में उपस्थित रहेंगे और विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न कराएंगे। राम जन्मोत्सव के इस ऐतिहासिक क्षण को भव्य और व्यवस्थित बनाने के लिए मंदिर प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं।
श्रद्धालुओं तक इस विशेष आयोजन को पहुंचाने के लिए सीधा प्रसारण की व्यवस्था भी की गई है। इसके लिए राम मंदिर परिसर में 6 उच्च गुणवत्ता वाले कैमरे लगाए गए हैं, जो पूरे अनुष्ठान को लाइव कवर करेंगे। इससे देश-विदेश में बैठे भक्त भी इस दिव्य क्षण के साक्षी बन सकेंगे।
सुरक्षा और व्यवस्था के मद्देनज़र प्रशासन ने विशेष नियम लागू किए हैं। सूर्य तिलक से आधा घंटा पहले और आधा घंटा बाद तक वीआईपी पास से प्रवेश पर रोक रहेगी, ताकि आयोजन सुचारु रूप से संपन्न हो सके और किसी प्रकार की भीड़-भाड़ की समस्या उत्पन्न न हो।
रामनवमी के दिन श्रद्धालु सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक रामलला के दर्शन कर सकेंगे। आम दिनों की तुलना में यह समय अवधि बढ़ाई गई है, ताकि अधिक से अधिक भक्त भगवान श्रीराम के दर्शन कर सकें और पुण्य लाभ प्राप्त कर सकें। आमतौर पर रामलला के दर्शन का समय सुबह 6:30 बजे से रात 9:30 बजे तक होता है।
इसके अतिरिक्त, आरती पास धारकों के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा एक अलग लाइन की व्यवस्था की गई है, जिससे उन्हें सुगमता से दर्शन और आरती का लाभ मिल सके।
अयोध्या में इस रामनवमी को लेकर भक्ति और उल्लास का वातावरण चरम पर है। मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया जा रहा है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आधुनिक तकनीक और परंपरा के मेल का भी एक अनुपम उदाहरण बन गया है।