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राम मंदिर ट्रस्ट विवाद: इस्तीफे के बाद भी चंपत राय का प्रभाव कायम? वीडियो में जाने VIP पास और फंड प्रबंधन को लेकर उठे सवाल

 

अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर में ट्रस्ट से जुड़े विवाद के बीच पूर्व महासचिव चंपत राय को लेकर नए सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि महासचिव पद से इस्तीफा देने के बाद भी मंदिर की व्यवस्थाओं में उनका प्रभाव बना हुआ है। खासतौर पर वीआईपी पास जारी करने और ट्रस्ट के बैंक खातों के प्रबंधन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

बताया जा रहा है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट में चढ़ावे से जुड़े आरोपों के बाद चंपत राय ने 26 जून को महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद 6 जुलाई को उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया। हालांकि, इसके बावजूद मंदिर की कई व्यवस्थाओं में उनके करीबियों की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

VIP पास व्यवस्था पर उठे सवाल

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सूत्रों के अनुसार, चंपत राय की अनुशंसा पर मंदिर परिसर में सेवा कार्यों के लिए कई सेवादारों की नियुक्ति की गई थी। आरोप है कि इनमें से कुछ लोगों की आईडी अभी भी सक्रिय हैं और वे वीआईपी दर्शन पास जारी करने की प्रक्रिया में शामिल हैं।

जिन लोगों के नाम सामने आ रहे हैं, उनमें सुबोध, मयंक चौहान, रास बिहारी, रजनीश, गजानन और उनके ड्राइवर बबलू तिवारी सहित कई अन्य सेवादार शामिल हैं। आरोप है कि ये लोग अभी भी मंदिर की व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।हालांकि, इन आरोपों पर ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, जांच एजेंसियां पूरे मामले की पड़ताल कर रही हैं।

1800 करोड़ रुपये के फंड प्रबंधन को लेकर भी चर्चा

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के पास मंदिर निर्माण और व्यवस्थाओं के लिए बड़ी राशि जमा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 1800 करोड़ रुपये के फंड से जुड़े बैंक खातों के संचालन को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।आरोप है कि इन खातों की देखरेख में भी चंपत राय के करीबी लोगों की भूमिका बनी हुई है। हालांकि, बैंक खातों के संचालन और अधिकारों को लेकर ट्रस्ट की ओर से विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

SIT जांच की भूमिका पर भी उठे सवाल

चढ़ावे से जुड़े कथित विवाद की जांच के लिए गठित एसआईटी की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। चर्चा है कि एसआईटी की रिपोर्ट में चंपत राय को राहत मिल सकती है और उन्हें मामले में "सेफ एग्जिट" दिया गया है।हालांकि, जांच रिपोर्ट की आधिकारिक जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। ऐसे में इस संबंध में लगाए जा रहे दावों की पुष्टि नहीं हो पाई है।

ट्रस्ट की छवि और पारदर्शिता पर बहस

श्रीराम मंदिर देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है। ऐसे में ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, आर्थिक प्रबंधन और प्रशासनिक फैसलों में पारदर्शिता को लेकर लगातार चर्चा होती रही है।चंपत राय के इस्तीफे के बाद भी यदि व्यवस्थाओं में उनके करीबियों की भूमिका बनी रहती है तो यह ट्रस्ट के सामने एक बड़ी चुनौती हो सकती है। अब सभी की नजरें जांच प्रक्रिया और ट्रस्ट की ओर से उठाए जाने वाले अगले कदमों पर टिकी हैं।