6 बार मंत्री रहे राम आसरे कुशवाहा की 13 साल बाद सपा में वापसी, BJP छोड़ फिर थामा अखिलेश यादव का साथ
उत्तर प्रदेश की राजनीति में गुरुवार को एक अहम घटनाक्रम सामने आया। प्रदेश सरकार में छह बार मंत्री रह चुके प्रोफेसर राम आसरे कुशवाहा ने भारतीय जनता पार्टी छोड़कर एक बार फिर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। करीब 13 साल बाद उनकी सपा में वापसी हुई है। राम आसरे कुशवाहा पहले समाजवादी पार्टी में महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारी संभाल चुके हैं और अब एक बार फिर पार्टी के साथ जुड़ गए हैं।
राम आसरे कुशवाहा की सपा में वापसी ऐसे समय हुई है, जब उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। उनके पार्टी में शामिल होने के दौरान कई समर्थकों और अलग-अलग संगठनों से जुड़े लोगों के भी सपा में शामिल होने की जानकारी सामने आई है।
2013 में सपा से हुआ था अलगाव
राम आसरे कुशवाहा वर्ष 2013 में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव थे। इसी दौरान मुजफ्फरनगर दंगों को लेकर उनका रुख पार्टी लाइन से अलग सामने आया था। इसके बाद तत्कालीन सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने उन्हें राष्ट्रीय महासचिव पद से हटा दिया था। कुछ समय बाद उनका सपा से भी अलगाव हो गया। उस समय सरकार ने उनसे मंत्री पद का दर्जा भी वापस ले लिया था।
सपा से अलग होने के बाद राम आसरे कुशवाहा ने अपनी राजनीतिक राह बदलते हुए भारतीय जनता पार्टी का रुख किया। करीब 13 साल तक वह सपा से बाहर रहे। अब उन्होंने भाजपा छोड़कर फिर समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली है।
बसपा से शुरू किया था राजनीतिक सफर
राम आसरे कुशवाहा का राजनीतिक सफर बहुजन समाज पार्टी से शुरू हुआ था। वर्ष 1996 में वह बसपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे। इसके बाद वह समाजवादी पार्टी में शामिल हुए और संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। उन्हें सपा के राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी भी मिली थी। वह उत्तर प्रदेश सरकार में छह बार मंत्री रह चुके हैं।
कुशवाहा की पहचान उत्तर प्रदेश की राजनीति में पिछड़े वर्ग से आने वाले नेता के तौर पर रही है। कानपुर से उनका राजनीतिक जुड़ाव भी रहा है और वह सरसौल विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं।
सपा में वापसी पर क्या बोले राम आसरे?
समाजवादी पार्टी में दोबारा शामिल होने के बाद राम आसरे कुशवाहा ने मुलायम सिंह यादव को याद किया। उन्होंने कहा कि उन्हें आज भी ऐसा महसूस होता है कि नेताजी उनके बीच मौजूद हैं। उन्होंने पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व को लेकर भी अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की।
कुशवाहा ने सम्मान को राजनीति में महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि जहां सम्मान मिलेगा, वहीं व्यक्ति का जुड़ाव बना रहेगा। उन्होंने अपने समर्थकों से अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाने के लिए काम करने की अपील भी की।
चुनाव से पहले वापसी की चर्चा
राम आसरे कुशवाहा की सपा में वापसी आगामी विधानसभा चुनाव से पहले हुई है। उनके लंबे राजनीतिक अनुभव और पिछड़े वर्ग के बीच पहचान के कारण उनके दोबारा सपा में शामिल होने की चर्चा है। हालांकि इस वापसी का चुनावी प्रभाव कितना होगा, इसका आकलन आने वाले समय में ही किया जा सकेगा।
करीब 13 साल बाद राम आसरे कुशवाहा का सपा में लौटना उनके राजनीतिक सफर में एक नया अध्याय है। अब देखना होगा कि पार्टी में उन्हें आगे कौन-सी भूमिका दी जाती है और वह संगठन में किस तरह सक्रिय होते हैं।