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रेलवे की नई पहल: लंबी दूरी की ट्रेनों में अब साफ और खुशबूदार बेडरोल

 

लंबी दूरी की ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों के लिए अब सफर और वापसी दोनों में स्वच्छ और खुशबूदार बेडरोल मिलने की व्यवस्था शुरू हो गई है। भारतीय रेलवे ने नई नीति लागू की है, जिसके तहत अब केवल प्रारंभिक स्टेशन से ही नहीं, बल्कि अंतिम स्टेशन पर भी लिनेन लोड किया जाएगा।

इस नई व्यवस्था के लागू होने से वापसी यात्रा में इस्तेमाल किए गए बेडरोल यात्रियों को दोबारा नहीं दिए जाएंगे। इससे पहले यात्रियों की शिकायत रहती थी कि ट्रेन में एक ही बार लोड किया गया बेडरोल पूरी यात्रा और वापसी में इस्तेमाल किया जाता था। इस वजह से गंदगी और दुर्गंध की समस्या बनी रहती थी, जिससे सफर का अनुभव प्रभावित होता था।

रेलवे ने बताया कि इस सुविधा के पहले चरण में देशभर की 42 ट्रेनों में लागू किया गया है। इसमें पूर्वोत्तर रेलवे से गुजरने वाली दस प्रमुख ट्रेनें शामिल हैं, जिनमें आसनसोल-गोंडा, लखनऊ-चंडीगढ़, जयनगर-नई दिल्ली जैसी गाड़ियां प्रमुख हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य यात्रियों को सफर के दौरान स्वच्छता और बेहतर सुविधा सुनिश्चित करना है।

रेलवे के प्रवक्ता ने बताया, "अब यात्रियों को वापसी यात्रा में नए बेडरोल मिलेंगे। इससे सफाई और स्वच्छता दोनों सुनिश्चित होंगी। यात्रियों को गंदे या दुर्गंध वाले लिनेन का सामना नहीं करना पड़ेगा।" उन्होंने कहा कि इस नीति से यात्रियों का सफर अनुभव और आरामदायक बनेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी दूरी की ट्रेनों में यात्रियों की सुविधा और सफाई पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। बेडरोल की नियमित सफाई और नई व्यवस्था से न केवल संक्रमण का खतरा कम होगा, बल्कि यात्रियों की संतुष्टि भी बढ़ेगी।

यात्री संगठनों का कहना है कि यह पहल लंबे समय से मांग में थी। यात्रियों ने अक्सर शिकायत की थी कि पुराना और इस्तेमाल किया हुआ लिनेन मिलने से यात्रा असुविधाजनक हो जाती थी। अब यह व्यवस्था लागू होने से यात्रियों को साफ-सुथरे और सुरक्षित बेडरोल मिलेंगे।

रेलवे ने बताया कि आगे के चरण में अन्य ट्रेनों में भी इस व्यवस्था को विस्तार देने की योजना है। सभी ट्रेनों में नई नीति लागू होने के बाद यात्रियों को पूरे सफर के दौरान स्वच्छ और नए बेडरोल मिलेंगे। अधिकारियों ने यह भी कहा कि इस व्यवस्था की निगरानी और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित ऑडिट और कर्मचारियों की ट्रेनिंग की जाएगी।

इस पहल से न केवल यात्रियों का सफर बेहतर होगा, बल्कि रेलवे की सेवा की गुणवत्ता और सार्वजनिक संतुष्टि भी बढ़ेगी। यात्री और विशेषज्ञ दोनों इसे एक सकारात्मक कदम मान रहे हैं, जो रेलवे की सुविधा और सुरक्षा को और मजबूत करेगा।