×

वीडियो में देंखे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मथुरा में संत प्रेमानंद महाराज से की मुलाकात, आध्यात्मिक चर्चा में लिया भाग

 

मथुरा और वृंदावन में शुक्रवार को एक आध्यात्मिक और गरिमामय दृश्य देखने को मिला, जब भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की। यह मुलाकात वृंदावन स्थित उनके आश्रम में हुई, जहां राष्ट्रपति ने लगभग 25 मिनट तक संत के साथ आध्यात्मिक विषयों पर चर्चा की।

<a style="border: 0px; overflow: hidden" href=https://youtube.com/embed/Sg1OwTvdzJQ?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/Sg1OwTvdzJQ/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden;" width="640">

सुबह करीब 7 बजे, बारिश के बीच राष्ट्रपति अपने परिवार के साथ आश्रम पहुंचीं। उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज को हाथ जोड़कर प्रणाम किया, जिस पर संत ने “राधे-राधे” कहकर उनका अभिवादन स्वीकार किया। इस अवसर पर आश्रम में मौजूद संतों ने राष्ट्रपति का पारंपरिक रूप से माला पहनाकर और चुनरी ओढ़ाकर स्वागत किया।

मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने संत प्रेमानंद महाराज को उनके जन्मदिन की बधाई भी दी। उल्लेखनीय है कि संत का 56वां जन्मदिन गुरुवार, 19 मार्च को मनाया गया था। इस मौके पर यह मुलाकात और भी खास और भावनात्मक बन गई।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उत्तर प्रदेश के तीन दिवसीय दौरे पर हैं। इस दौरे के दौरान उन्होंने कई धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों का भ्रमण किया। गुरुवार को उन्होंने अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर में रामलला के दर्शन किए थे, जिसके बाद वे शाम को मथुरा पहुंचीं।

मथुरा और वृंदावन, जो भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़े पवित्र स्थल माने जाते हैं, में राष्ट्रपति की यह यात्रा धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। संत प्रेमानंद महाराज के साथ हुई इस मुलाकात ने आध्यात्मिक मूल्यों और भारतीय परंपराओं को एक बार फिर उजागर किया।

मुलाकात के बाद राष्ट्रपति का अगला कार्यक्रम बाबा नीम करौली आश्रम में जाने का है, जहां वे एक अन्य प्रसिद्ध संत के आश्रम का दौरा करेंगी। उनके इस दौरे को देशभर में आध्यात्मिक जुड़ाव और सांस्कृतिक एकता के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।

राष्ट्रपति की इस यात्रा ने न केवल स्थानीय लोगों के बीच उत्साह पैदा किया, बल्कि देशभर में भी इस खबर को लेकर सकारात्मक चर्चा देखने को मिल रही है। उनकी यह यात्रा भारत की आध्यात्मिक विरासत और संत परंपरा के प्रति सम्मान को दर्शाती है।