राजधानी लखनऊ में बड़े बुलडोजर ऐक्शन की तैयारी, निशाने पर कई शोरूम और कॉम्प्लेक्स
राजधानी लखनऊ में एक और बड़े 'बुलडोजर एक्शन' (ध्वस्तीकरण अभियान) की तैयारी चल रही है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) अयोध्या रोड पर ट्रैफिक मैनेजमेंट को बेहतर बनाने के लिए सख्त कदम उठाने जा रहा है। सड़कों और राजमार्गों पर वाहनों की पार्किंग को रोकने के लिए, LDA यह सुनिश्चित करेगा कि सड़क के किनारे स्थित कॉम्प्लेक्स, शोरूम और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में पार्किंग की सुविधा को फिर से बहाल किया जाए। जो शोरूम, दुकानें या अन्य व्यावसायिक गतिविधियां अभी पार्किंग के लिए तय की गई जगहों पर चल रही हैं, उन्हें वहां से हटा दिया जाएगा, ताकि इन जगहों को उनके मूल उद्देश्य—यानी पार्किंग—के लिए खाली कराया जा सके। LDA इन प्रतिष्ठानों के संचालकों और भवन मालिकों को आधिकारिक नोटिस जारी करेगा।
यह फैसला पिछले हफ्ते ट्रैफिक मैनेजमेंट में सुधार को लेकर हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक में लिया गया था। इसके बाद, LDA के जोनल अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया गया है। प्राधिकरण अब अयोध्या रोड पर ऐसी इमारतों की पहचान करने की तैयारी कर रहा है, जहां पार्किंग के लिए तय की गई जगहों का इस्तेमाल किसी और काम के लिए किया जा रहा है, और उन्हें नोटिस जारी करने जा रहा है। **पार्किंग एरिया में बनी दुकानों को हटाना होगा**
LDA की इस कार्रवाई के दायरे में वे इमारतें आएंगी, जहां स्वीकृत बिल्डिंग प्लान में पार्किंग के लिए तय की गई जगहों पर दुकानें, शोरूम या अन्य व्यावसायिक इकाइयां बना ली गई हैं। पार्किंग की जगह खाली कराने के लिए ऐसे अवैध निर्माणों को हटा दिया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वाहन इमारत के परिसर के भीतर ही पार्क किए जा सकें। नियमों के तहत, कुछ मामलों में 'कंपाउंडिंग' प्रक्रिया के जरिए बिल्डिंग की अनियमितताओं को नियमित किया जा सकता है—बशर्ते वहां पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था फिर से बहाल कर दी जाए।
**अहमदपुर और रौनाही में कंट्रोल रूम बनाए जाएंगे**
NHAI (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) के अधिकारियों के अनुसार, राजमार्ग पर लगे सभी कैमरों की निगरानी के लिए अहमदपुर और रौनाही में कंट्रोल रूम बनाए जाएंगे। अगर इन कैमरों के जरिए कोई आपातकालीन स्थिति सामने आती है, तो तुरंत पेट्रोलिंग टीमों को अलर्ट कर दिया जाएगा, ताकि वे जल्द से जल्द मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाल सकें। ये कंट्रोल रूम पास के ट्रैफिक कंट्रोल सेंटरों से भी जुड़े होंगे, जिससे तेज गति (ओवरस्पीडिंग) के लिए जुर्माना लगाने की प्रक्रिया आसान हो जाएगी।