प्रसूता-नवजात को ट्यूब पर चारपाई रखकर नदी पार कराई, बाढ़ के पानी में जान जोखिम में डाल रहे ग्रामीण
बाढ़ और जलभराव के बीच ग्रामीणों की मुश्किलों का एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है। प्रसव के बाद प्रसूता और नवजात को अस्पताल से घर ले जाने के लिए ग्रामीणों को ट्यूब के सहारे चारपाई रखकर नदी पार करानी पड़ी। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें ग्रामीण बाढ़ के पानी के बीच जान जोखिम में डालकर प्रसूता और नवजात को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं।
बताया जा रहा है कि क्षेत्र में नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण रास्ते पानी में डूब गए हैं। आवागमन का सामान्य रास्ता बंद होने से ग्रामीणों के सामने बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है। ऐसे हालात में प्रसूता और नवजात को घर पहुंचाने के लिए ग्रामीणों ने स्थानीय स्तर पर इंतजाम किया।
ट्यूब पर चारपाई रखकर बनाया सहारा
वीडियो में देखा जा सकता है कि एक बड़े ट्यूब के ऊपर चारपाई रखी गई और उसी पर प्रसूता को नवजात के साथ बैठाया गया। ग्रामीण चारपाई को संभालते हुए बाढ़ के पानी के बीच आगे बढ़ते नजर आए।
पानी का बहाव और गहराई देखते हुए यह सफर बेहद जोखिम भरा दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों ने किसी तरह प्रसूता और बच्चे को सुरक्षित दूसरी ओर पहुंचाने का प्रयास किया।
बाढ़ के कारण बढ़ी परेशानी
लगातार बारिश और नदी के बढ़े जलस्तर के कारण क्षेत्र के कई रास्ते प्रभावित बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के दौरान आवागमन की सुविधा बेहद मुश्किल हो जाती है। जरूरी काम के लिए भी लोगों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ता है।
सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को होती है। आपात स्थिति में अस्पताल तक पहुंचना भी चुनौती बन जाता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांगी सुविधा
ग्रामीणों ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक पानी कम नहीं होता, तब तक प्रशासन को नाव या अन्य सुरक्षित साधनों की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि किसी आपात स्थिति में लोगों की जान जोखिम में न पड़े।
प्रसूता और नवजात को इस तरह नदी पार कराने का वीडियो सामने आने के बाद बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य और परिवहन सुविधाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
फिलहाल ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन बाढ़ प्रभावित गांवों में तत्काल राहत और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था करे, ताकि भविष्य में किसी मरीज, प्रसूता या नवजात को इस तरह खतरनाक तरीके से नदी पार करने के लिए मजबूर न होना पड़े।