मेरठ में हवा चलते ही 24 घंटे में आधा हुआ प्रदूषण, AQI 343 से गिरकर 172 पर पहुंचा; सांस के मरीजों की परेशानी बरकरार
उत्तर प्रदेश के मेरठ में हवा की रफ्तार बढ़ने से वायु प्रदूषण के स्तर में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 343 से घटकर 172 पर पहुंच गया। यानी करीब 24 घंटे के भीतर प्रदूषण का स्तर लगभग आधा रह गया। इससे लोगों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन सांस, दमा और हृदय संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को अब भी सावधानी बरतने की जरूरत है।इससे पहले मेरठ में हवा की गति कम होने के कारण प्रदूषक तत्व वातावरण में जमा हो रहे थे। इसके चलते AQI 343 तक पहुंच गया था और शहर में धुंध की स्थिति बनने लगी थी। हालात में बदलाव के बाद तेज हवा ने प्रदूषकों को फैलाने में मदद की, जिससे वायु गुणवत्ता सूचकांक में गिरावट आई।
हवा की रफ्तार बढ़ने से मिली राहत
मौसम में हवा चलने से प्रदूषण के कण एक जगह जमा रहने के बजाय फैलने लगे। इससे शहर की वायु गुणवत्ता में सुधार दर्ज किया गया। पिछले दिनों शांत हवा और प्रदूषकों के जमीन के करीब जमा होने को प्रदूषण बढ़ने की प्रमुख वजह बताया गया था।हालांकि, AQI में गिरावट का मतलब यह नहीं है कि हवा पूरी तरह साफ हो गई है। 172 का AQI अभी भी मध्यम श्रेणी में आता है। इस स्तर पर संवेदनशील लोगों, खासकर सांस और फेफड़ों से जुड़ी बीमारी वाले मरीजों को परेशानी हो सकती है।
सांस के मरीज रखें खास सावधानी
प्रदूषण में कमी के बावजूद सांस, दमा और हृदय रोग से पीड़ित लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए। सुबह और शाम बाहर निकलते समय अपनी सेहत का ध्यान रखें। यदि बाहर जाने पर खांसी, सांस लेने में परेशानी या सीने में जकड़न महसूस हो, तो गतिविधि रोककर चिकित्सकीय सलाह लें।बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस संबंधी बीमारी से जूझ रहे लोगों को भी प्रदूषण के स्तर पर नजर रखनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर बाहर की गतिविधियां सीमित करना उचित रहेगा।
फिर बढ़ सकता है प्रदूषण
हवा चलने से प्रदूषण में राहत मिल सकती है, लेकिन यदि हवा की गति दोबारा कम होती है और प्रदूषक तत्व जमा होने लगते हैं, तो AQI फिर बढ़ सकता है। वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों की धूल और अन्य प्रदूषण स्रोत भी वायु गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं।फिलहाल मेरठ के लोगों को प्रदूषण में आई गिरावट से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन हवा की गुणवत्ता पर लगातार नजर रखना जरूरी है। AQI 343 से 172 तक गिरना राहत का संकेत है, साफ हवा की गारंटी नहीं।