☰
×

रामभद्राचार्य के बयान पर प्रयागराज कोर्ट में याचिका, वीडियो में जाने जिला अदालत ने 12 अक्टूबर को पेश होने का नोटिस जारी किया

 

तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य के एक कथित बयान को लेकर प्रयागराज जिला अदालत में याचिका दाखिल की गई है। मामले में अदालत ने गुरुवार को रामभद्राचार्य को नोटिस जारी करते हुए 12 अक्टूबर को कोर्ट में पेश होने के लिए कहा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि वृंदावन में भागवत कथा के दौरान दिए गए उनके एक बयान से उपाध्याय समाज की सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हुई और समाज के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

बयान को लेकर उठाए गए सवाल

<a style="border: 0px; overflow: hidden" href=https://youtube.com/embed/lqxvnQN3u4k?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/lqxvnQN3u4k/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden;" width="640">

याचिकाकर्ता के मुताबिक, रामभद्राचार्य ने भागवत कथा के दौरान कथित तौर पर कहा था कि ऊंच कुल के ब्राह्मण अपनी बेटियां उपाध्याय, चौबे, त्रिगुणायत, दीक्षित और पाठक परिवारों में नहीं देते, क्योंकि उन्हें अधम माना जाता है।याचिकाकर्ता का आरोप है कि इस बयान के बाद उपाध्याय समाज के लोगों को लेकर समाज में नकारात्मक धारणा बनने लगी। उनका कहना है कि रामभद्राचार्य की बड़ी संख्या में लोग श्रद्धा करते हैं और उनके बयान का सामाजिक प्रभाव पड़ सकता है।

शादी में परेशानी का भी आरोप

याचिका में दावा किया गया है कि बयान के बाद उपाध्याय समाज के लड़के-लड़कियों के विवाह में भी कथित तौर पर अड़चनें आने लगी हैं। याचिकाकर्ता ने अदालत से मामले में कार्रवाई की मांग की है।याचिकाकर्ता का कहना है कि उन्होंने इस मामले को लेकर प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर से भी मुलाकात की थी और शिकायत दी थी, लेकिन आरोप के मुताबिक पुलिस की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने जिला अदालत का रुख किया।

12 अक्टूबर को पेश होने का निर्देश

प्रयागराज जिला अदालत ने याचिका पर सुनवाई के बाद जगद्गुरु रामभद्राचार्य को नोटिस जारी किया है। अदालत ने उन्हें 12 अक्टूबर को पेश होने के लिए कहा है। अब अगली सुनवाई में मामले से जुड़े तथ्यों और याचिका में लगाए गए आरोपों पर आगे की कार्रवाई तय होगी।फिलहाल अदालत की ओर से नोटिस जारी किया गया है। याचिका में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।