भारत-नेपाल सीमा पर अचल संपत्ति पंजीकरण में अब पैन अनिवार्य, पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ाने का कदम
भारत-नेपाल सीमा से जुड़े क्षेत्रों में अचल संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। अब इन क्षेत्रों में संपत्ति खरीदने या बेचने के लिए पैन कार्ड (PAN) अनिवार्य कर दिया गया है। यह आदेश महानिरीक्षक निबंधन ने जारी किया है और इसके तहत ऑनलाइन सॉफ्टवेयर में पैन प्रविष्टि और सत्यापन व्यवस्था लागू कर दी गई है।
अधिकारियों ने बताया कि यह कदम वित्तीय अपराधों पर रोक लगाने, संपत्ति लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ाने और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है। इसके जरिए अब कोई भी व्यक्ति अचल संपत्ति का लेन-देन करते समय पैन नंबर दर्ज किए बिना इसे संपन्न नहीं कर सकेगा।
संपत्ति पंजीकरण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अब पंजीकरण के समय सभी दस्तावेजों और भुगतान विवरण का पैन से मिलान किया जाएगा। इससे संपत्ति के असामान्य लेन-देन या काला धन के मामले पहले से अधिक आसानी से पकड़े जा सकेंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत-नेपाल सीमा के आसपास के इलाके लंबे समय से व्यापार और संपत्ति के लिए संवेदनशील माने जाते रहे हैं। अतीत में इन क्षेत्रों में कई बार फर्जी दस्तावेज और नकली संपत्ति पंजीकरण के मामले सामने आए हैं। पैन अनिवार्य करने से अब इन गतिविधियों पर नियंत्रण संभव होगा।
इस नई प्रणाली के तहत, संपत्ति खरीदने वाले और बेचने वाले दोनों पक्षों को पैन विवरण दर्ज करना और उसका सत्यापन कराना अनिवार्य होगा। अधिकारी इस व्यवस्था को ऑनलाइन और डिजिटल रूप से क्रियान्वित कर रहे हैं, जिससे प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और सुरक्षित बने।
पंजीकरण विभाग ने नागरिकों को चेतावनी दी है कि यदि कोई व्यक्ति पैन के बिना संपत्ति पंजीकरण कराने की कोशिश करेगा, तो उसकी अनुमोदन प्रक्रिया रद्द कर दी जाएगी। साथ ही, इस पर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
सरकार का मानना है कि यह कदम केवल वित्तीय पारदर्शिता तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा पार लेन-देन पर निगरानी भी मजबूत होगी। अधिकारियों ने कहा कि सीमा क्षेत्रों में संपत्ति का गलत इस्तेमाल रोकना और आर्थिक अपराधों को नियंत्रित करना इस नीति का मुख्य उद्देश्य है।
स्थानीय नागरिकों और संपत्ति निवेशकों ने इस कदम को स्वागत योग्य बताया। उनका कहना है कि इससे भ्रष्टाचार और गलत लेन-देन पर अंकुश लगेगा और संपत्ति खरीदने की प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय और सुरक्षित होगी।
इस प्रकार, भारत-नेपाल सीमा से जुड़े अचल संपत्ति पंजीकरण में पैन अनिवार्यता ने पारदर्शिता, सुरक्षा और वित्तीय निगरानी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में इसे और अधिक डिजिटल और सख्त निगरानी वाले रूप में लागू किया जाएगा।