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जौनपुर में रामलीला के दूसरे दिन सीता हरण और लंका दहन का मंचन, देर रात तक जुटे रहे दर्शक

 

जौनपुर के तेजीबाजार क्षेत्र स्थित चौखड़ा गांव में आयोजित तीन दिवसीय रामलीला के दूसरे दिन सीता हरण और लंका दहन की लीला का मंचन किया गया। श्री साईं सीताराम धर्म मंडल धरिकारे बीर बाबा के यहां आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में कलाकारों ने रामायण के प्रसंगों को मंच पर जीवंत किया। रामलीला देखने के लिए ग्रामीणों और आसपास के क्षेत्रों से लोग पहुंचे।

कार्यक्रम रात करीब 10 बजे शुरू हुआ और देर रात लगभग 2 बजे तक चलता रहा। इस दौरान कलाकारों ने अपने अभिनय के जरिए दर्शकों को रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंगों से रूबरू कराया। सीता हरण और लंका दहन के दृश्यों को देखने के लिए दर्शक देर रात तक कार्यक्रम स्थल पर मौजूद रहे।

सीता हरण के प्रसंग का किया गया मंचन

रामलीला के दूसरे दिन सबसे पहले सीता हरण का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने रावण द्वारा साधु का वेश धारण करने और माता सीता का हरण करने की घटना का मंचन किया। इस प्रसंग के माध्यम से दर्शकों को रामायण की उस घटना से परिचित कराया गया, जिसके बाद भगवान राम और लक्ष्मण माता सीता की खोज में निकलते हैं।

मंचन के दौरान कलाकारों ने संवाद और अभिनय के माध्यम से कथा को आगे बढ़ाया। दर्शकों ने पूरे ध्यान से लीला का आनंद लिया।

हनुमान जी ने जलाई सोने की लंका

कार्यक्रम में लंका दहन का प्रसंग भी आकर्षण का केंद्र रहा। कलाकारों ने हनुमान जी के लंका पहुंचने, माता सीता से भेंट करने और रावण की लंका में आग लगाने की लीला प्रस्तुत की। इस प्रसंग के मंचन के दौरान दर्शकों में विशेष उत्साह देखने को मिला।

रामायण के इन प्रसंगों के जरिए भगवान राम की कथा और हनुमान जी की भक्ति को दर्शाया गया। कलाकारों की प्रस्तुति ने देर रात तक दर्शकों को कार्यक्रम से जोड़े रखा।

देर रात तक चलता रहा धार्मिक आयोजन

तीन दिवसीय रामलीला के दूसरे दिन का कार्यक्रम रात करीब 10 बजे शुरू हुआ था। सीता हरण और लंका दहन के मंचन के बाद कार्यक्रम देर रात लगभग 2 बजे संपन्न हुआ। गांव और आसपास के क्षेत्रों के लोगों ने बड़ी संख्या में पहुंचकर रामलीला देखी।

स्थानीय स्तर पर आयोजित ऐसे धार्मिक कार्यक्रम ग्रामीणों को एक साथ जुड़ने और रामायण के प्रसंगों को समझने का अवसर देते हैं। रामलीला के माध्यम से नई पीढ़ी को भी भगवान राम की कथा और उससे जुड़े आदर्शों से परिचित कराया जाता है।

फिलहाल रामलीला के तीसरे और अंतिम दिन होने वाले प्रसंगों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।