गुरु पूर्णिमा पर यूपी में उमड़ा आस्था का सैलाब: वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज ने दिए राधारानी स्वरूप में दर्शन, काशी में मुस्लिमों ने उतारी आरती
उत्तर प्रदेश में बुधवार को गुरु पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। प्रदेशभर के मठों, आश्रमों और धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। इस दौरान वृंदावन, प्रयागराज और काशी में अलग-अलग धार्मिक परंपराओं की झलक देखने को मिली।
वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन को उमड़े भक्त
वृंदावन में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर संत प्रेमानंद महाराज ने भक्तों को विशेष स्वरूप में दर्शन दिए। महाराज राधारानी के स्वरूप में सजे नजर आए। उनके दर्शन के लिए हजारों की संख्या में शिष्य और श्रद्धालु पहुंचे।
बताया गया कि गुरु पूर्णिमा के मौके पर 5 हजार से ज्यादा लोगों ने संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन किए। शिष्यों ने गुरु के स्वागत में आरती उतारी और श्रद्धा भाव से उनका आशीर्वाद लिया। आश्रम परिसर में भजन-कीर्तन और आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
प्रयागराज में किन्नर अखाड़े की अनोखी प्रस्तुति
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर प्रयागराज में भी विशेष आयोजन हुए। यहां किन्नर अखाड़े से जुड़ीं किन्नर साध्वियों ने नृत्य कर अपनी भक्ति और श्रद्धा व्यक्त की। उनके इस कार्यक्रम ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
किन्नर अखाड़े के सदस्यों ने गुरु परंपरा और आध्यात्मिक संस्कृति के महत्व को बताया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
काशी में दिखी गंगा-जमुनी तहजीब
वाराणसी यानी काशी में गुरु पूर्णिमा के मौके पर सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल देखने को मिली। यहां कुछ मुस्लिम समुदाय के लोगों ने संत की आरती उतारी और गुरु पूर्णिमा के आयोजन में शामिल होकर श्रद्धा व्यक्त की।
काशी की इस परंपरा ने एक बार फिर धार्मिक सद्भाव और आपसी भाईचारे का संदेश दिया।
पूरे प्रदेश में हुए धार्मिक आयोजन
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उत्तर प्रदेश के कई जिलों में संतों, गुरुओं और आध्यात्मिक संस्थानों में विशेष पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने अपने गुरु का पूजन कर जीवन में सही मार्गदर्शन और सुख-शांति की कामना की।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरु पूर्णिमा गुरु के प्रति सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करने का पर्व है। इस दिन गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करना विशेष फलदायी माना जाता है। यूपी में हुए विभिन्न आयोजनों ने भक्ति, संस्कृति और सामाजिक सद्भाव की तस्वीर पेश की।